मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी करते हुए मोदी सरकार की आलोचना की हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि मोदी सरकार ने विरोध की आवाज दबाने के लिए दमनकारी क़ानूनों का इस्तेमाल किया हैं.

ब्रिटेन स्थित गैर सरकारी संगठन ने अपनी वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में कहा, भारत मे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं पत्राकारों को सरकारी और राज्येतर तत्वों की ओर से हमले एवं धमकियों का सामना करना पड़़ा है. संगठन का कहना है कि सरकार ने बहुत से ग़ैर सरकारी संगठनों के विदेश से चंदा लेने पर रोक लगा दी है. इसे इन संगठनों को परेशान करने के तौर पर देखा जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को सरकार और नॉन स्टेट एक्टर्स की धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा. इसमें पत्रकार करुण मिश्र और राजदेव रंजन की हत्या का भी ज़िक्र किया गया है.  रिपोर्ट में भारत सरकार के नोटबंदी के परिणामों को भी रेखांकित किया गया है. इसमें कहा गया है, भारत में बड़े नोटों पर प्रतिबंध का मकसद देश में काले धन को लेकर कार्रवाई करना था. लेकिन इससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई.

रिपोर्ट में कहा गया है, तथाकथित गोरक्षक समूहों द्वारा गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने वाले कानूनों के पालन के नाम पर गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश एवं कर्नाटक समेत राज्यों में लोगों पर हमला किए जाने, उन्हें परेशान किए जाने और जाति आधारित हिंसा को चिंता के विषयों के रूप में रेखांकित किया गया है.

रिपोर्ट कहती है कि भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक और ग़ैरज़रूरी बल प्रयोग किया. पूरी घाटी में दो महीने से अधिक तक कर्फ्यू लगा दिया गया, निजी कंपनियों की संचार सेवाओं को ठप कर दिया गया. इससे लोगों को परेशानी हुई, यहां तक की उन्हें ज़रूरी मेडिकल सेवाओं के लिए भी परेशान होना पड़ा.


शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

Loading...

कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें