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हिज़बुल्लाह के महासचिव हसन नसरुल्लाह ने अमेरिका की साजिशों से आगाह करते हुए कहा कि पूरा मध्य-पूर्व तेल और गैस की कीमत चुका रहा है. मध्यपूर्व की लड़ाई तेल की जंग बन चुकी है. अमेरिका मध्यपूर्व के तेल और गैस पर कब्जा करने के लिए जंग भड़का रहा है.

उन्होंने कहा कि ज़ायोनी दुश्मन, अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने जैसे अवसर की तलाश में था ताकि गोलान हाइट्स को इस्राईल में विलय कर सके. उनका कहना है कि गोलान हाइट्स केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय नहीं है बल्कि पानी, तेल और गैस का विशाल भंडार है.

हसन नसरुल्लाह ने सीरिया की जंग का हवाला देते हुए कहा कि सीरिया में ISIS की हार के बावजूद देश के कुछ हिस्सों पर अमरीका ने कब्जा जमाया हुआ है. क्योंकि पूर्वी फ़ुरात नदी में तेल के कुएं और गैस के महत्वपूर्ण भंडार हैं. उनका कहना है कि सीरिया के कुर्दों को भी अतीत के अनुभवों से पाठ सीखना चाहिए.

इसके अलावा उन्होंने क़तर संकट के पीछे भी तेल और गैस को ही जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा, खाड़ी संकट का कारण क़तर के गैस भंडार पर नियंत्रण के लिए कुछ देशों का प्रयास है और इराक़ को भी अमरीका, तेल भण्डार के रूप में देखता है इसीलिए वह वहां पर अपना वर्चस्व बनाने के लिए छावनियां बना रहा है.

उधर लेबनान के समुद्री क्षेत्र में स्थित तेल के स्रोतों के निकट इस्राईल की गतिविधियां तेज़ हो गई हैं. जिसका उदाहरण ज़ायोनी शासन के युद्धमंत्री का ब्यान है जिसमे उन्होंने कहा कि लेबनान का तेल और गैस का नवां कुआं, ज़ायोनी शासन का है.

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