Saturday, November 27, 2021

मीडिया पर ढेरों पाबंदी, फिर भी पश्चिम के लिए इजरायल एक लोकतांत्रिक देश

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इस्राईल अपनी मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है, जबकि इस्लामी और पश्चिमी देश इस बात से अनजान हैं, और पश्चिमी देश इस क्षेत्र में इस्राईल को एक लोकतांत्रिक देश के रूप में देखते हैं।

इस लेख में, हम मीडिया पर इस्राईल की तरफ़ से ढाए जाने वाले अत्याचारों को बयान करेंगे जिससे खुद ज़ायोनी भी सुरक्षित नहीं है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सूची में इस्राईल की नंबर « New Guinea» और « Suriname» जैसे देशों के भी बाद में आता है जो इस्राईल के लिए शर्म की बात है तो कि मध्य पूर्व में खुद को स्वतंत्रता का एक प्रमुख मानता है।

इस्राईली एजेंसियां ​​देश में हर कार्य पर नज़र रखती है, और हर वह समाचार जो दुश्मन के लिए उपयोगी हो उसको प्रकाशित करने या फिर उसपर विश्लेषण करने की अनुमति नहीं देती हैं।, किसी भी न्यूज़ चैनल या एजेंसी को कोई भी समाचार प्रकाशित करने से पहले इन संस्थानों से अनुमति लेनी होती है बिना अनुमति के किसी भी समाचार को प्रकाशित नहीं किया जा सकता है।

कानून का उल्लंखन करने वाले रिपोर्टर को कार्य करने की अनुमति नहीं है और उसे किसी सैन्य इलाके की कवरेज करने का किसी विशेष व्यक्ति का साक्षात्कार करने की भी अनुमति नहीं होती है।

ये संस्थान केवल रेडियो टीवी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वेबसाइटों और सोशल मीडिया की भी निगरानी भी करते हैं, और उनकी इच्छा के बिना कोई समाचार प्रकाशित नहीं की जा सकती है।

इस क्षेत्र में इस्राईल के एक डेमोक्रेटिक देश होने का दावा अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के विरुद्ध है। 2013 से अब तक इस्राईल अभिव्यक्ति की आज़ादी की सूची में 15 स्थान नीचे आ चुका है और इस समय वह 91 नंबर पर है।

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