एक जर्मन अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि एक मुस्लिम व्यक्ति जिसने एक महिला से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया, उसे जर्मन नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए।

जनाकारी के अनुसार, 2002 से जर्मनी में रह रहे 40 वर्षीय लेबनानी डॉक्टर  धार्मिक कारणों से महिलाओं से हाथ मिलाने से इनकार करते हैं। बाडेन-वुर्टेमबर्ग (वीजीएच) के प्रशासनिक न्यायालय ने फैसला सुनाया कि कोई व्यक्ति “संस्कृति और मूल्यों के कट्टरपंथ” के कारण एक हैंडशेक को अस्वीकार कर देता है। क्योंकि वे महिलाओं को “यौन प्रलोभन के खतरे के रूप में देखते हैं।”

वहीं सरकार ने कहा कि हमारे देश के संविधान में धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। यह हमारे संविधान में निहित समानता का उल्लंघन है। इसलिए, हम ऐसे किसी भी व्यक्ति को नागरिकता नहीं दे सकते हैं जो देश के संविधान में आस्था न जताए।

हालांकि उन्होने जर्मनी की संविधान में आस्था जताने और आतंकवाद की निंदा करने के शपथपत्र पर भी हस्ताक्षर किया था। जब उसने अपने सभी कागजातों को जर्मनी सरकार की महिला अधिकारी को सौंपा तब उसने धार्मिक आधार पर उनसे हाथ मिलाने से साफ इनकार कर दिया था।

डॉक्टर का कहना है कि उसने अपनी पत्नी से वादा किया था कि वो दूसरी महिलाओं से हाथ नहीं मिलाएगा। इससे पहले, प्रशासन ने डॉक्टर की नागरिकता के आवेदन को खारिज कर दिया था. जिसके खिलाफ उसने अदालत में अपील दायर की थी।

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