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माले: मालदीव में राजनीतिक उठापटक के बीच अब राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने से इनकार कर दिया है. जिसके बाद देश में अब संकट गहरा गया है. लोग सड़कों पर आ गए हैं तो वहीँ आर्मी को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

शुक्रवार को मालदीव की सर्वोच्च अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद पर चल रहे मुकदमे को असंवैधानिक करार दिया था और कैद किए गए विपक्ष के 9 सांसदों को रिहा करने का आदेश भी जारी किया. जिसके चलते मालदीव में विपक्षी दल बहुमत प्राप्त करता दिख रहा है.

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हालांकि मालदीव की सरकार ने अदालत के फैसले को मानने से इंकार करते हुए संसद को स्थगित कर दिया. अटॉर्नी जनरल मोहम्मद अनिल ने कहा कि ‘‘राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने का सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला असंवैधानिक और अवैध है. इसलिए मैंने पुलिस और सेना से कहा है कि किसी भी असंवैधानिक आदेश का अनुपालन न करें.’’

वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रवक्ता हामिद अब्दुल गफूर ने कहा कि पुलिस ने रात में दो वरिष्ठ जजों को गिरफ्तार करने की कोशिश की जिसमें चीफ जस्टिस भी शामिल हैं, उन पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए हैं.

कौन हैं मोहम्मद नशीद ?

मोहम्मद नशीद लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मालदीव के पहले राष्ट्रपति हैं. साल 2015 में उन्हें आंतकवाद विरोधी कानूनों के तहत सत्ता से हटा दिया गया था. नशीद को 13 साल जेल की सजा सुनाई गई. नशीद इस समय श्रीलंका में हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार और राष्ट्रपति को तुरंत पद से इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने सुरक्षाबलों से अपील की कि वे संविधान की रक्षा करें.

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