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मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने रविवार को नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची द्वारा म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के ‘नरसंहार’ रोकने के लिए कोई कदम न उठाने पर आलोचना करते हुए कहा कि म्यांमार सरकार को रोहिंग्या मुस्लिमों के खुनी दमन को रोकना चाहिए.

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आंग सान सू ची को नोबेल पुरस्कार किस लिए मिला हैं ? उन्हें नोबेल पुरस्कार देने का कोई फायदा हिन् नहीं हुआ हैं. उन्होंने आगे कहा, ” हम आंग सान सू ची को बताना चाहते हैं कि अब रोहिंग्या मुस्लिमों पर बहुत जुल्म हो गया. हम और हमारा अल्लाह अब उनकीं हिफाजत करेगा. अल्लाहु अकबर!

मलेशियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि “हम ओआईसी (इस्लामी सहयोग संगठन) के साथ मिलकर काम करेंगे. उन्होंने सयुंक्त राष्ट्र की आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र कुछ करो! दुनिया चुपचाप बेठे हुए इस जनसंहार को नहीं देख सकती.

हाल ही में  संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी संस्था यूएनएचसीआर के प्रमुख जॉन मैकइस्सिक ने कहा था कि म्यांमार , रोहिंग्या मुसलमानों का खात्मा चाहता है. म्यांमार के रखाईन प्रांत में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ सुरक्षाबलो और सैन्य बलों ने एक अभियान चला रखा है. सैन्य बल वहां कत्लेआम आम कर रहा है. पुरुषो को गोली मारी जा रही है, उनके घर जलाए जा रहे है और महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, दुनिया में सबसे पीड़ित अल्पसंख्यकों में रोहिंग्या मुसलमान हैं जिसकी म्यांमार में 11 लाख के करीब आबादी हैं.

बर्मा ह्यूमन राइट्स नेटवर्क (BHRN) के अनुसार म्यांमार सरकार अंतरराष्ट्रीय कानून का जानबूझकर उल्लंघन कर रही है और विश्व को किए वादे को ताक पर रख अपराध कर रही है.


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