कुआलालंपुर. भारत द्वारा मलेशिया से पॉम ऑयल आयात बंद किए जाने के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा कि वह भारत के आगे नहीं झुकेंगे।

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने और एनआरसी-सीएए पर भारत की कड़ी आलोचना कर चुके महातिर मोहम्मद ने कहा कि वह भारत सरकार के फैसले को लेकर चिंतित हैं हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वह गलत चीजों को लेकर आवाज उठाना जारी रखेंगे भले ही इसकी कीमत उनके देश को आर्थिक तौर पर क्यों ना चुकानी पड़े।

महातिर ने पत्रकारों से कहा, ”हम इसे लेकर चिंतित हैं क्योंकि भारत हमारे पाम तेल का बड़ा ख़रीदार रहा है। लेकिन दूसरी तरफ़ अगर कुछ ग़लत हो रहा है तो हमें स्पष्ट रहने की ज़रूरत है। हम ग़लत को ग़लत कहेंगे। अगर हम फ़ायदे को देखते हुए ग़लत होने देंगे और कुछ नहीं बोलेंगे तो कई चीज़ें ग़लत दिशा में जाएंगी। फिर हम भी ग़लत करना शुरू कर देंगे और बाक़ियों को भी बर्दाश्त करेंगे।”

भारत हर साल करीब 9 लाख टन पॉम ऑयल आयात करता है। 2019 में करीब 5 लाख टन पॉम ऑयल मलेशिया से खरीदा गया। जानकार बताते हैं कि इस साल यह 1 लाख टन से भी कम हो सकता है। हालांकि भारतीय कारोबारी अब मलेशिया के बदले इंडोनेशिया से प्रति टन 10 डॉलर ज़्यादा की क़ीमत पर पाम तेल ख़रीद रहे हैं।

मलेशियाई अधिकारियों का कहना है कि वे इस नुकसान की भरपाई के लिए पाकिस्तान, फिलीपींस, म्यांमार, वियतनाम, इथयोपिया, सऊदी अरब, मिस्त्र, अल्जीरिया और जॉर्डन को अपना खाद्य तेल बेचने की कोशिश कर रहे हैं। मलेशियाई ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने अपने बयान में कहा है, हम दोनों सरकारों से आग्रह करते हैं कि निजी और डिप्लोमैटिक अहम को किनारे रख कोई समाधान निकालें।

वहीं मलेशिया के प्राथमिक उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 2018 में पाकिस्तान ने 10.16 लाख टन पाम तेल का आयात किया था। यह कारोबार 73 करोड़ डॉलर का था। हम पाकिस्तान से आयात और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

Loading...
लड़के/लड़कियों के फोटो देखकर पसंद करें फिर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें

 

विज्ञापन