Thursday, August 5, 2021

 

 

 

भारत में इस्लामोफोबिया को लेकर कुवैती वकील ने की संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की मांग की

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कुवैत सिटी: निज़ामुद्दीन मरकज मामले के सामने आने के बाद जिस तरह से देश भर में कोरोना के प्रसार के लिए जमात और मुस्लिम लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया।  इसके साथ ही देश भर में मुस्लिमों के खिलाफ हिं’सा और भेदभाव के मामलों भी सामने आए। ऐसे में अब मध्य पूर्व में शाही परिवार के सदस्यों के साथ-साथ वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता और भारतीय प्रवासी वर्गों ने मुसलमानों पर अत्याचार की निंदा शुरू कर दी।

इसी बीच अब कुवैती के वकील ने संयुक्त राष्ट्र को हस्तक्षेप करने और बढ़ते उत्पीड़न को रोकने का आह्वान किया है। खालिद अल जवाफ़ान ने ट्वीट किया, “हम अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद, इस्लामी सहयोग के संगठन और सभी मानवाधिकार संगठनों को बुलाते हैं, भारत में हमारे मुस्लिम भाइयों के खिलाफ किए गए उल्लंघन को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करें #भारत।”

खालिद अल सुवैफ़न एक वकील और कुवैत बार एसोसिएशन के निदेशक मंडल के सदस्य और वकीलों की प्रवेश समिति के सदस्य हैं। इससे पहले उन्होने ट्वीट किया था: # भारत में हिंसा कुछ दावे के रूप में एक आंतरिक मामला नहीं है, लेकिन यह मानवता के खिलाफ अपराध है और अंतरराष्ट्रीय मौन के साथ जातिवाद का जघन्य अभ्यास और जो भी हो रहा है, उसके लिए मानव अधिकार संगठनों की अनुपस्थिति है। #Islamophobia_In_India

उन्होंने ट्वीट किया, ” #कोरोनोवायरस का मुकाबला करने में विफल #भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली से ध्यान से ध्यान हटाने के लिए मुसलमानों के प्रति जातिवादी बयानबाजी नहीं की जाना चाहिए क्योंकि #महामारी धर्मों के बीच अंतर नहीं करती है।”

उन्होने ट्वीट किया, “#भारत एक प्राचीन विशाल देश है, और लोगों ने सदियों से विभिन्न धर्मों और जातियों के साथ शांति से सहवास किया है, और #भारत के मुसलमानों के खिलाफ ये नस्लवादी अपराध भारत की छवि को धूमिल कर देंगे, जो मानव अधिकारों की वाचाओं की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।”

एक वकील के ट्वीट को भी सुवाफ़न ने री-ट्वीट किया: “हमारे मुस्लिम भाइयों के खिलाफ भारत में मानवीय अपराध मानवता के सबसे बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और मानव अधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा लेख 25,7,12,18 के विपरीत हैं जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाया गया था और भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक है।”

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