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संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव कूफ़ी अन्नान म्यांमार की सेना के हाथों रोहिंग्या मुस्लिमों के हाथों हुए अत्याचार की जांच के लिए मंगलवार को म्यांमार पहुंचे थे. म्यांमार की दूसरी यात्रा के बाद अन्नान को रोहिंग्या मुस्लिमों और बौद्ध समुदाय के बीच शांति स्थापित करने वाले प्रस्ताव के सलाहकार आयोग का प्रमुख भी नियुक्त किया गया.

अन्नान की पहली यात्रा सितंबर के महीने में हुई थी. उनकी यात्रा 13 अक्टूबर को मंडगाँव की तीन चौकियों पर हुए हमले के पहले हुई थी. इस दौरान मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं के अनुसार मंडगाँव में सेना के जुल्मों के कारण 30,000 नागरिकों को विस्थापित होना पड़ा. साथ ही म्यांमार सेना के रोहिंग्या गांवों में एक हजार से अधिक मकान जलाने, रोहिंग्या मुस्लिमों के क़त्ल और उनकी महिलाओं से बलात्कार का खुलासा हुआ.

पिछले हफ्ते ही अन्नान ने उत्तरी अराकान में हिंसा के फैलने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सुरक्षा बलों से कानून और शासन के अनुपालन का आग्रह किया था. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR के प्रमुख John McKissick ने म्यांमार के अधिकारी रोहिंग्या ममुसलमानों के जातीय सफायें में लगे हुए हैं.

गौरतलब रहें कि राखिने में एक लाख से अधिक रोहिंग्या समुदाय के लोगों को म्यांमार के नागरिकों के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है और वे बांग्लादेश में आप्रवासियों के रूप में जिंदगी बिता रहे हैं. इसके अलावा 2012 से 120,000 के आसपास लोग 67 शिविरों में गंभीर रूप से प्रतिबंधात्मक जीवन जी रहे हैं. वहीँ कम से कम 160 लोग सांप्रदायिक हिंसा में मारे गये हैं.


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