तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान ने कहा कि जेरुसलम के मामले में सयुंक्त राष्ट्र के नतीजे मुस्लिम दुनिया की एकता का परिणाम है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में जेरुसलम का अनुमोदन दिखाता है कि मुस्लिम दुनिया एकता में क्या कर सकती है.

रविवार को सूडानी संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, जेरूसलम पर आपातकालीन शिखर सम्मेलन के जरिए जो सफलता मिली. उसने यह साबित कर दिया गया है कि मुस्लिम दुनिया कितनी मजबूत हो सकती है जब वे मिलकर काम करते हैं”.

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ध्यान रहे जेरुसलम को इजरायल की राजधानी घोषित करने वाले अमेरिका के फैसले के खिलाफ तुर्की और यमन द्वारा लाये गए प्रस्ताव के समर्थन में सयुंक्त राष्ट्र की आम सभा में 128 वोट पड़े थे. जबकि अमेरिका के समर्थन में केवल 9 देशों ने वोट किया था.

इसी के साथ उन्होंने रोहिंग्या मुद्दें का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, “हम में से किसी को भी रोहिंग्या मुसलमानों की हत्याओं के बारे में चुप रहने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, फ़लस्तीनियों को वर्षों से के उत्पीड़न का सामना करना पड़  रहा है, सीरिया, इराक, लीबिया, यमन और सोमालिया में मानवतावादी संकट है.

इस दौरान उन्होंने सूडान के राष्ट्रपति उमर अल-बशीर को इस्तांबुल में 13 अगस्त को आपातकालीन ओआईसी शिखर सम्मेलन में शामिल होने और जेरुसलम पर साथ देंने के लिए शुक्रिया किया.

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