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इजरायल समाचार पत्र हाआर्तज़ ने खबर दी है कि इजरायली सूचना मंत्री “यसराईल काट्ज़” ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को तेल अवीव की यात्रा के लिए आमंत्रित किया है.

ये खबर ऐसे समय में सामने आई है जबकि पूरी मुस्लिम वर्ल्ड जेरुसलम और अल-अक्सा के मुद्दें पर एकजुट हो रही है. ऐसे में ये खबर किसी भूचाल से कम नहीं है. ऐसे में स्पष्ट हैं कि इजरायल सऊदी अरब के जरिए इस्लामिक देशों की एकता को तहस-नहस करना चाहता है.

ध्यान रहे सऊदी अरब की विदेशनीती पूरी तरह से अमेरिका पर आधारित है. साथ ही क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का अमेरिका की और झुकाव ज्यादा है. उनेक और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और उनके सलाहकार जार्ड कोशेंज़ से रिश्ते किसी से छुपे नहीं है.

ऐसे में इस्लामिक देशों की एकता की बीच मोहम्मद बिन सलमान, नेतन्याहू और ट्रम्प का त्रिकोण बनता हुआ नजर आ रहा है. इजरायल अब सऊदी अरब के साथ संबंधों के सामान्यीकरण से बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में जुट चूका है. वह संबंधों को सामान्यीकरण कर सऊदी अरब को इस्लामी देशों से अलग कर देना चाहता है.

इजरायल को पता है कि धार्मिक आधार पर सऊदी अरब को इस्लामी दुनिया में एक विशेष स्थान प्राप्त है और इसी के साथ सऊदी अरब का वर्तमान शासन इस देश को क्षेत्रीय राजनीति में आगे लाना चाहता है.

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