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अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 6 दिसंबर को बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता देने और अमरीकी दूतावास को तेल अविव से बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित करने का एलान किया था.

इस फैसले के विरोध में संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 दिसंबर को तुर्की और यमन की और से एक प्रस्ताव पारित हुआ जिसमें ट्रम्प के फ़ैसले को अमान्य घोषित किया गया. इस प्रस्ताव के समर्थन में 128 देशों ने मतदान किया था. जबकि सिर्फ़ नौ देशों ने ही इसका विरोध किया था. साथ ही 35 देश मतदान में शामिल नहीं हुए थे.

विरोध में वोट करने वालों में ग्वाटेमाला, होन्डुरस, मार्शल द्वीप, माइक्रोनीसिया, नाउरू, पलाउ और टोगो थे. इन देशों को लाखों डॉलर में इजरायल ने खरीदा था.

इस बात का खुलासा इस्राईली वेबसाइट वाईनेटन्यूज़ की गुरुवार को आई रिपोर्ट में हुआ. जिसमे इस्राईली विदेश मंत्रालय की टेन्डर कमेटी ने नाउरू के लिए बिना टेन्डर पास किए 72000 डॉलर मूल्य के स्यूएज सिस्टम को ख़रीदने की इजाज़त दी थी.

इसी तरह ज़ायोनी शासन की विदेश मंत्रालय की टेन्डर कमेटी ने भारत के लिए 115000 डॉलर के डिसैलिनेशन प्लांट के उपहार को हरी झंडी दी थी लेकिन नाउरू के विपरीत भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया.

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