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फ़िलिस्तीन के इस्लामी जेहाद आंदोलन के महासचिव रमज़ान अब्दुल्लाह शलह की बुधवार को तेहरान में हुई ईरान के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई से मुलाक़ात में वरिष्ठ नेता ने कहा, “जैसा कि हमने पहले भी कहा है कि ज़ायोनियों के ख़िलाफ़ फ़िलिस्तीनियों और मुसलमानों के एक-जुट संघर्ष से अगले 25 साल में ज़ायोनी शासन का वजूद नहीं रहेगा.

उन्होंने आगे कहा कि फ़िलिस्तीन के विषय को भुलाने के लिए ज़ायोनी शासन के समर्थकों की ओर से निरंतर पैदा किए जा रहे संकटों के बावजूद यह पवित्र भूमि फ़िलिस्तीनी गुटों व राष्ट्र के प्रतिरोध के नतीजे में आज़ाद होकर रहेगी. उन्होंने बैतूल मुक्कदस की आजादी को लेकर कहा कि पवित्र क़ुद्स की मुक्ति का सिर्फ़ एक ही रास्ता है और वह प्रतिरोध व संघर्ष है, इसके अलावा किसी भी दूसरे रास्ते का कोई नतीजा नहीं निकलेगा.

उन्होंने इस्लामी जेहाद आंदोलन की ओर से ज़ायोनियों के मुक़ाबले में एकता व प्रतिरोध के लिए 10 सूत्रीय योजना पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए, संघर्ष जारी रखने, साठगांठ के समझौतों को पूरी तरह निरस्तर करने, फ़िलिस्तीनी गुटों के बीच एकता पर आग्रह और दुश्मन के साथ साठगांठ के लिए कुछ रूढ़ीवादी सरकारों की कोशिशों की निंदा को इस योजना के महत्वपूर्ण बिन्दु बताए.

वरिष्ठ नेता ने सीरिया में हुए सुन्नी मुसलमानों के नरसंहार के लिए अमरीका और उसके कुछ क्षेत्रीय घटकों को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि हलब, मूसिल सहित दूसरे शहरों में सुन्नी मुसलमानों का तकफ़ीरियों के हाथों जनसंहार हुआ और हो रहा है, इसलिए इन संकटों का शिया-सुन्नी से कोई संबंध नहीं है.

उनहोंने आगे कहा कि क्षेत्र का सबसे अहम विषय दाइश, नुस्रा फ़्रंट सहित दूसरे आतंकवादी गुटों से सामूहिक रूप से निपटना है, क्योंकि अगर ऐसा न हुआ तो तकफ़ीरियों की ओर से निरंतर संकट पैदा होने के कारण फ़िलिस्तीन का विषय हाशिये पर चला जाएगा.


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