इजराइल की एक न्यूज़ वेबसाइट वाई न्यूज़ के अनुसार, इजराइल ने अपने एक सैनिक की सजा पर रोक लगा दी है. सैनिक पर एक घायल फिलिस्तीनी को गोली मारने का आरोप है. सैनिक एलोर अज़रया ने 21 वर्षीय घायल युवक अब्दुल फताह अल शरीफ को घायलावस्था में ही गोली मार दी थी. वाई नेट के अनुसार सैनिक एलोर अज़रया की सजा रविवार को शुरू होनी थी लेकिन अब वह अपनी यूनिट में ‘खुली निगरानी’ में रहेगा. सैनिक पर आरोप सिद्ध होने के बाड़ से वह सेना में अपनी यूनिट की ‘खुली निगरानी’ में ही रखा गया है.

जज ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये साबित हो चुका है कि अज़रया से जनता के लिए कोई खतरा नहीं है और वो किसी व्यक्ति के लिए खतरा साबित नहीं होगा.  हालांकि अभियोजन पक्ष ने शुरू में अज़रया के अनुरोध पर आपत्ति जताई और कहा कि प्रतिवादी को हत्या का दोषी ठहराया गया था, उस्न्बे जानबूझ कर एक हत्या की जो बदला लेने की इच्छा से प्रेरित थी, उसने सेना के आदेशों का भी उल्लंघन किया, सेना के मूल्यों का उल्लंघन किया. पर आखिरकार अभियोजन पक्ष की दलील ख़ारिज कर दी गयी.

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अज़रया के वकील योरम शेफ्टेल ने कहा कि 10 में से 9 सैनिक अज़रया की रिहाई चाहते हैं. वाई नेट ने बताया कि अदालत ने अज़रया के वकील को पूरी अपील रविवार तक दाखिल कराने का आदेश दिया है. अदालत ने कहा कि अपील की सुनवाई की तारीख जितनी जल्दी मुमकिन हो तय की जाएगी. वहीँ अल-शरीफ के परिवार और फिलीस्तीनी नेतृत्व के सदस्यों ने इस मामले को एक “शो ट्रायल” कहा है.

इज़राइली दैनिक हरेत्ज़ ने अल-शरीफ को उद्धृत करते हुए कि शुरुआत से हम यह जानते थे कि यह एक शो परीक्षण था जो हमें न्याय नहीं देगा। यद्यपि सैनिक को वीडियो में ऐसा करते पकड़ा गया था और यह स्पष्ट है कि यह एक साजिशन की गयी हत्या है. लेकिन दोषी को जो सजा दी गयी वो एक बच्चे को पत्थर मारने की सजा से भी कम है.

अल शरीफ के परिवार ने तय किया है कि वे इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय अदालत में ले कर जायेंगे.

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