संयुक्त राष्ट्र में फ़िलिस्तीन के स्थायी प्रतिनिधि रियाद मंसूर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष को तीन समान पत्र भेजे हैं, जिसमें बताया गया है कि इस्राईल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 पर अमल नहीं कर रहा है और यह इस्राईल द्वारा वैश्विक नियमों का खुला उल्लंघन है।

मंसूर ने ऐसे हालात से खबरदार किया है, क्योंकि इस्राईल अवैध बस्तियां बनाने के अलावा पश्चिमी तट और कुद्स में अत्याचार और हिंसा कर रहा है, और उनकी ग़ाज़ा के हवाले से अवैध नीति के कारण कुछ विश्लेषकों के अनुसार इस्राईल ग़ाज़ा पर सैन्य हमला कर सकता है।

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विश्व समुदाय को, ग़ाज़ा में 10 साल से जारी इस्राईल के प्रतिबंध के परिणामस्वरूप 1 लाख नागरिकों की कठिनाइयों पर ध्यान देने की जरूरत है, जो कि इस्राईल द्वारा वैश्विक नियमों के भी खिलाफ़ हैं, और इस्राईल के इन कदमों से इस क्षेत्र की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है।

इसके अलावा इस्राईली सैनिक, आम फिलिस्तीनी नागरिकों से अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं, जिनमें से एक 15 वर्षीय «यूसुफ शाबान» पर हमला है, जिसकी वजह से वह शहीद हो गया था, यह 2017 की शुरुआत से चौथे फ़िलीस्तीनी की शहादत है।

बिजली कटौती की वजह से आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है और सुविधाएं न मिलने के कराण परेशानी बढ़ गई है।

मंसूर ने विश्व समुदाय से मांग की है कि इस्राईल को ग़ाज़ा पर हमले बंद करने और इसे वैश्विक नियमों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए।

मंसूर ने कहा: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2334 के बाद भी इस्राईल पश्चिमी तट में बस्तियों के अवैध निर्माण जारी रखे हुए है, जो शांति के रास्ते में रुकावटें है, और प्रस्ताव की घोषणा होने के एक महीने बाद इस्राईल ने घोषणा की कि वह पश्चिमी तट पर 6000 (अवैध) घर बनाएगा।

गौरतलब है कि यह प्रस्ताव वैश्विक निर्णय से पारित हुआ है, और इस्राईल द्वारा इसके उल्लंघन से पता चलता है कि इस्राईल एक वैश्विक कानून को नहीं मानता और उसे इस बात की सजा भी नहीं मिल रही।

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