राजधानी तेहरान में आयोजित हुई छठीं अंतरराष्ट्रीय फिलिस्तीन कान्फेंस के समापन पर ईरान के राष्ट्रपति ने फिलिस्तीन के मुद्दें को इस्लामी जगत का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा करार देते हुए कहा कि इजराइल में एक फर्जी सरकार का फर्जी शासन हैं. जो पश्चिमी देशों द्वारा गठित की गई हैं. इसी के साथ पश्चिमी देशों की सरपरस्ती में ये फर्जी सरकार मानवाधिकारों का खुले आम हनन करती हैं.

उन्होंने कहा, फिलिस्तीन, एक जाति की दूसरी जाति से समस्या का नाम नहीं है बल्कि यह अत्याचार और अतंराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की अयोग्यता का चिन्ह है और इसके साथ ही अपने अधिकारों के लिए लड़ने वाले एक राष्ट्र के गौरव का प्रतीक तथा विश्व समुदाय के लिए लज्जाजनक और कुछ इस्लामी देशों के लिए कलंक का टीका है.

राष्ट्रपति हसन रूहानी ने आगे कहा कि ज़ायोनी विश्व समुदाय को यह विश्वास दिलाने का प्रयास कर रहे हैं फिलिस्तीनी एेसे शरणार्थी हैं जिनकी अपनी कोई भूमि नहीं है और उनके प्रतिरोध व संघर्ष को आतंकवाद का नाम दिये जाने और समझौता करने की कोशिशों की अस्ल वजह यही है.

राष्ट्रपति ने मध्य पूर्व के हालात का ज़िक्र करते हुए कहा कि यमन, इराक़ सीिरया और अफगानिस्तान में जंग और खून खराबे से हर दिन सैंकड़ों लोग मारे जा रहे हैं और इस्लामी सरकारें युद्धों और मुसलमानों के जनसंहार को खत्म करने के लिए एक दूसरे  के साथ सहयोग के बजाए एक दूसरे पर आरोप व प्रत्यारोप में व्यस्त हैं और इस खेदजनक स्थिति का फायदा ज़ायोनी शासन को पहुंचता है.

राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान का मानना है कि मध्य पूर्व में व्यापक और न्यायपूर्ण शांति की स्थापना फिलिस्तीन के अतिग्रहण को समाप्त करने और फिलिस्तीनी जनता के सभी अधिकारों की वापसी के बिन संभव नहीं है. इस सम्मेलन में विश्व के 80 देशों से 700 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया हैं.


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