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ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रूहानी 15 फरवरी को आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुँच चुके है. अपने दौरे के दौरान वे सबसे पहले हैदरबाद पहुंचे. यहाँ रूहानी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों और मौलानाओं की एक सभा को संबोधित किया.

रूहानी ने इस दौरान भारत को मौजूदा दौर में शांति का एक बेहतरीन उदाहरण करार देते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष को मिलिट्री से हल नहीं किया जा सकता है. साथ ही वह यह बताना भी नहीं भूले कि ईरान हर मुसलमान देश के साथ अच्‍छे संबंध चाहता है और भारत के साथ भी उसे अपने रिश्‍ते अच्‍छे रखने हैं.

उन्होंने ने इस दौरान शिया और सुन्‍नी मुसलमानों के बीच एकता की अपील भी की. उन्होंने कहा, ‘भारत आज एक ऐसा जीता-जागता उदाहरण है जहां पर अलग-अलग धर्म और संप्रदाय के लोग एक साथ रह रहे हैं. यह प्रक्रिया यहां पर कई वर्षों से चल रही है.’  रूहानी ने कहा कि शिया, सुन्‍नी, सूफी, हिंदू, सिख और दूसरे कई धर्मों के लोग एक साथ रह रहे हैं. एक साथ वह अपने देश का निर्माण करते हैं और एक सभ्‍यता को भी तैयार करते हैं.

ईरानी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान ने पिछले कई वर्षों में दक्षिण एशिया में जारी खून-खराबे और संघर्ष को बंद करने के लिए कोशिशें की हैं. उनका कहना था कि उनका देश सभी मुसलमान देशों के साथ भाईचारा बढ़ाना चाहता है. उन्‍होंने कहा कि ईरान किसी दूसरे मुसलमान देश के साथ अंसतोष नहीं चाहता है जिसके साथ उसके काफी पुराने रिश्‍ते हैं। ईरान का मानना है कि मतभेदों के समय में भी गोली समाधान नहीं हो सकती है. बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने और भाईचारा बढ़ाने में ईरान यकीन रखता है. किसी भी तरह के मतभेद या फिर संघर्ष को सेना या मिलिट्री नहीं सुलझा सकती है.

रूहानी ने इस दौरान यह भी कहा कि उनका देश हमेशा से अफगानिस्‍तान, ईराक, सीरिया और यमन की मदद करने को तैयार था.

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