ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल मोहम्मद होसेन बाकेरी और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजावा ने म्यांमार में चल रहे रोहिंग्या मुस्लिम संकट के बारे में चिंता व्यक्त की और मुस्लिम दुनिया की दुर्दशा को खत्म करने में मुस्लिम विश्व कार्रवाई की मांग की.

रविवार को एक टेलीफोन बातचीत में, दोनो शीर्ष जनरलों ने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए दोनों देशों की सशस्त्र बलों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की.

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उन्होंने मुस्लिम दुनिया पर अधिक काम करने और दक्षिण पूर्व एशियाई देश में रोहिंग्या समुदाय के “प्रतिकूल” और “अमानवीय” स्थिति को रोकने में मदद को लेकर चर्चा की.

बाक़ीरी और बाजवा ने कहा कि मुस्लिम देशों के सैन्य और गैर-सैन्य संगठन म्यांमार में सताए हुए मुस्लिमों को मानवीय राहत में गति देने के लिए अपनी ताकतों और सुविधाओं से लाभ उठा सकते है.

म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों ने लंबे समय से गंभीर भेदभाव का सामना किया है और 2012 में भी हिंसा के दौरान सैकड़ों रोहिंग्या मार डाले गए थे और लगभग 140,000 लोगों को अपना घर छोड़ शिविरों में रहना पड़ा था.

12 सितंबर को, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने कहा कि म्यांमार में हाल की हिंसा से पलायन करने वाले रोहंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की संख्या लगभग 370,000 तक बढ़ गई है.

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