अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेताते हुए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शनिवार को कहा कि टकराव की स्थिति में ट्रंप को भी सद्दाम हुसैन की ही तरह अंजाम भुगतना होगा।

उन्होंने कहा, ‘ईरान अपने रक्षात्मक हथियार खत्म नहीं करेगा, इसमें वह मिसाइल भी शामिल कार्यक्रम भी है, जिसे लेकर अमेरिका गुस्से में है।’ वहीं, कुछ दिन पहले खबर आई थी कि भारत, ईरान पर नए सिरे से लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध कर सकता है।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मई में ईरान के साथ हुई न्यूक्लियर डील खत्म कर नए सिरे से प्रतिबंध लगाए थे। वहीं, ईरान ने कुछ सप्ताह पहले धमकी दी कि अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में वह अन्य देशों के तेल निर्यात को बाधित करने के लिए खाड़ी में सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है।

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हालांकि, अमेरिका खाड़ी में अपना नौैसैनिक बेड़ा तैनात रखता है ताकि तेल से लदे जहाजों के समुद्री मार्गो की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।रूहानी के संबोधन के बाद शनिवार को ईरान के 600 पोतों ने खाड़ी में नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लिया। इससे पहले शुक्रवार को उसने समुद्री मार्गो के ऊपर वायुसैनिक अभ्यास किया था।

इसी बीच ईरान में सैन्य परेड के दौरान बड़ा हमला हुआ है, जिसमें 24 लोगों की जान चली गई, जबकि 53 अन्य घायल हो गए। इनमें कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। ईरान में यह बड़ा हमला तब हुआ है, जब वह 1980-88 के बीच इराक के साथ हुए संघर्ष की सालगिरह मना रहा है।

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ईरान के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि ईरान के अहवाज शहर में शनिवार को हुए आतंकवादी हमले के लिए अमेरिका और उनके क्षेत्रीय सहयोगी जिम्मेदार हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनई ने जारी बयान में कहा, यह अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगियों की साजिश है, जो ईरान में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि जिन्होंने आतंकवादियों को मदद पहुंचाई है, वे भी इस हमले के लिए जिम्मेदरा हैं। रूहानी ने ईरान की खुफिया एजेंसियों को इस हमले के गुनहगारों को पकड़ने के आदेश दिए हैं।

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