दिल्ली हिंसा को लेकर ईरान में भारतीय दूतावास पर हुआ विरोध-प्रदर्शन

ईरान की राजधानी तेहरान में भारतीय दूतावास के सामने दिल्ली में हुई मुस्लिम विरोधी हिंसा को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। जिसमे ईरानी छात्रों, बुद्धिजीवियों और आम लोगों ने भी हिस्सा लिया।

ईरानी प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान नारे लगाए और मुसलमानों के समर्थन में लिखे नारों की तख्तियों को हाथों में लिए हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने अंतर्राष्ट्रीय और मानवीय संगठनों से आग्रह किया कि वे हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ें, हिंसा पर एक मीडिया ब्लैकआउट लगाने के उद्देश्य से सेंसरशिप के प्रयासों को कम करें।

एक कार्यकर्ता ने कहा कि “हमें भारत में मुसलमानों के रक्तपात के प्रति उदासीन नहीं होना चाहिए। यह अनिवार्य रूप से हमारा कर्तव्य है कि जो भी व्यक्ति उत्पीड़न का सामना कर रहा है, उसके समर्थन करना चाहिए, क्योंकि उत्पीड़ित लोगों का समर्थन करना [ईरान की इस्लामी क्रांति] के प्रमुख मामलों में से एक है।

शाहद विश्वविद्यालय में देश की बासिज स्वयंसेवक बल की छात्र शाखा के प्रमुख ने कहा, “भारत सरकार को पता होना चाहिए कि यह अत्याचार अनुत्तरित नहीं रहेगा … भारत सरकार को कानूनी कार्रवाई का सामना करना चाहिए” इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री ने दिल्ली दंगों को मुस्लिमों के खिलाफ संगठित हिंसा करार दिया।

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उन्होने भारतीय अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सभी भारतीयों की सलामती सुनिश्चित करें और निर्रथक हिंसा को फैलने से रोकें। उन्होने अपने ट्वीट में लिखा था, सदियों से ईरान भारत का दोस्त रहा है। हम भारतीय अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे सभी भारतीयों का ख़्याल रखें और उनके साथ कोई अन्याय ना होने दें। शांतिपूर्ण संवाद और क़ानून के शासन में ही आगे का रास्ता निहित है।

इस मामले में भारत ने मंगलवार को ईरान के राजदूत अली चेगेनी को तलब किया और ईरान के विदेश मंत्री जवाद जाफरी द्वारा की गई टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया। ईरान के राजदूत को यह बताया गया कि जाफरी ने जिस मामले पर टिप्पणी की, वह पूरी तरह से भारत का आतंरिक मामला है।

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