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ईरान की राजधानी तेहरान में इस्लामिक एकता के लिए ‘इस्लामिक यूनिटी कांफ्रेंस’ शुरू हो चुकी हैं, 30वी ‘इस्लामिक यूनिटी कांफ्रेंस’ का उद्घाटन करते हुए ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि मुसलमानों को पैगंबर मुहम्मद (PBUH) की शिक्षाओं के जरिए अपनी एकता को मजबूत करना चाहिए, राष्ट्रपति रूहानी ने कहा, वर्तमान में झूठे विश्वासों के जरिए मुस्लिम युवकों को आकर्षित करने की सबसे बड़ी साजिश चल रही है.”

उन्होंने आगे कहा कि शिया और सुन्नी दोनों भाई हैं और दोनों ही इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद के रास्ते का पालन करें. उन्होंने कहा, इसलाम के दुश्मनों का मकसद निराशा को बढ़ावा देकर इस्लामी समाजों के अवसरों को खत्म करना हैं. रूहानी ने कहा कि यहूदी शासन का लक्ष्य जो इस क्षेत्र में मुसलमानों का खून बहा  रहे हैं, उन्हें जल्द ही संघर्ष के साथ निराश किया जाएगा.

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उन्होंने कहा, फालुजा और हलब को मुक्त होने के साथ ही जल्द ही भविष्य में, पूरे इराक और सीरियाई जमीन को मुक्त होगी. विश्व की प्रमुख शक्तियों और उनकी आश्रित सरकारों लगता है कि वे आतंकवादी समूहों का उपयोग करके अपने लक्ष्यों को अग्रिम कर सकते हैं, तो वे एक बड़ी गलती कर रहे हैं.

रूहानी ने कहा हम सभी इस्लामी देशों के बीच भाईचारे के दिनों को वापस लाने और यहूदी शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर एकता स्थापित करनी होगी, साथ ही अमेरिका और ब्रिटेन पर भरोसे के बजाय अल्लाह पर यकीन करना होगा. आज मुसलमानों को जागरूक करना हमारे ऊपर बड़ी जिम्मेदारी हैं.

उन्होंने आगे कहा, पैगंबर मुहम्मद (PBUH) ने मुसलमानों को एकता साथ रहने और अन्य धर्मों के साथ शांति से रहने के लिए कहा हैं. उन्होंने इमाम खुमैनी के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि अमेरिकी इस्लाम, पैगंबर मुहम्मद (PBUH) के शुद्ध इस्लाम के खिलाफ खड़ा है. उन्होंने कहा, शिया और सुन्नीयो ने अपनी एकता को  उपनिवेशवाद और विभाजन के खिलाफ स्वतंत्र बनाए रखा.

अपने भाषण की शुरुआत में, डॉ रूहानी ने पैगंबर मुहम्मद (PBUH) के जन्मदिन की बधाई दी और कहा “इसमें कोई शक नहीं कि पैगंबर मुहम्मद (PBUH) मानव इतिहास में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति है”

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