दशकों से विवादित कश्मीर मुद्दें पर ईरान ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की हैं. इस बारें में पाकिस्तान में तैनात ईरानी राजदूत मेहदी हुनर दूस्त ने कहा कि ईरान क्षेत्र में शांति व स्थिरता के लिए भारत-पाक तनाव कम करके कश्मीर मुद्दे के समाधान में मध्यस्थ की भूमिका अदा करने के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा कि ईरान सरकार ने क्षेत्र में शांति के लिए हर प्रकार के सहयोग की घोषणा की है. हालांकि मध्यस्थता के बारे में अभी तक पाकिस्तान या भारत की ओर से उनसे अधिकारिक अपील नहीं की गई. ईरानी राजदूत ने कहा कि भारत-पाकिस्तान तनाव न केवल दोनों देशों के लिए हानिकारक है बल्कि इससे क्षेत्र के दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी ग़लत प्रभाव पड़ेगा, क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए आवश्यक है कि दोनों देशों के मध्य अच्छे संबंध हों.

ईरानी राजदूत ने कहा, आतंकवाद एक वैश्विक मुद्दा है, यह किसी विशेष क्षेत्र या देश तक सीमित नहीं है और आतंकवाद विश्व की बड़ी शक्तियों की नीतियों का परिणाम है. यदि आतंकवाद की समीक्षा की जाए तो हमको पता चलेगा कि एक ओर सुपर पावर देश आतंकवाद से प्रभावित देश में आतंकवादी तत्वों की सहायता कर रहे हैं तो दूसरी ओर वह उनके विरुद्ध युद्ध भी कर रहे हैं. इसी विरोधाभासी दृष्टिकोण का परिणाम ही अच्छे और बुरे आतंकवादी के रूप में निकलता है.

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मेहदी हुनर दूस्त ने कहा कि इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी मुस्लिम देशों की समस्याओं के समाधान और एकता की स्थापना के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण प्लेट फ़ार्म है किन्तु इसमें अन्य देशों को शामिल करके इसका दायरा बढ़ाया जाए. उन्होंने आगे कहा, इस गठबंधन का भाग होने के कारण ईरान ने हमेशा मुस्लिम देशों से अच्छे संबंधों का प्रयास कर रहा है किन्तु इस संगठन के बावजूद इस समय कई इस्लामी देशों की स्थिति बदतर है और वहां की जनता बहुत ही दयनीय स्थिति में जीवन व्यतीत कर रही है.

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