ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले समझौते की निंदा की और इसे सभी मुसलमानों की ‘पीठ में छुरा घोंपना’ करार दिया। तेहरान ने शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के बयान में दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्यीकरण को खतरनाक, “शर्मनाक” बताया।

बयान में कहा गया, “यूएई सरकार और अन्य साथ वाली सरकारों को इस कार्रवाई के सभी परिणामों के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।” यह “अबू धाबी और तेल अवीव से रणनीतिक मूर्खता का एक कदम है। जो निस्संदेह क्षेत्र में प्रतिरोध अक्ष को मजबूत करेगा”

“फिलिस्तीन के दबे-कुचले लोगों और दुनिया के सभी मुक्त देशों ने आपराधिक इजरायल के कब्जे वाले शासन और उसके अपराधों में जटिलता के साथ संबंधों के सामान्यीकरण को कभी माफ नहीं किया।”

वहीं तुर्की ने यूएई से सभी सबंध तोड़ने की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने शुक्रवार को कहा कि खाड़ी राज्यके इजरायल के साथ शांति समझौते के बाद तुर्की संयुक्त अरब अमीरात के साथ अपने राजनयिक संबंधों को तोड़ सकता है।

एर्दोगन ने संवाददाताओं से कहा, “मैंने विदेश मंत्री को एक आदेश दिया। मैंने कहा कि हम अबू धाबी प्रशासन के साथ राजनयिक संबंधों को निलंबित कर सकते हैं या अपने राजदूत को वापस ले सकते हैं।” फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने गुरुवार को इस समझौते के विरोध में यूएई के अपने राजदूत को “तत्काल” बुलाने की घोषणा की।

एर्दोगन के प्रवक्ता इब्राहिम कालिन ने शुक्रवार को ट्वीट किया, “इतिहास उन लोगों को नहीं भूलेगा, जो फिलिस्तीनी लोगों के साथ विश्वासघात करते हैं और फिलिस्तीनी को बेच देते हैं।” उन्होने कहा, फिलिस्तीनी लोगों के साथ तुर्की हमेशा खड़ा रहेगा।”

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