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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कहा है कि सऊदी अरब अगर चाहता है कि अमरीकी सैनिक सीरिया में बने रहें, तो उसे इसके लिए भुगतान करना होगा।

पिछले हफ़्ते सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान की अमरीका यात्रा के दौरान, ट्रम्प ने घोषणा की थी कि अमरीका, सीरिया से अपने सैनिकों को बाहर निकाल लेगा। अमरीकी राष्ट्रपति की इस घोषणा के बाद, रियाज़ ने वाशिंगटन से आग्रह किया था कि वह सीरिया से अपने सैनिकों को बाहर नहीं निकाले।

हालांकि सीरिया से बाहर निकलने की डोनल्ड ट्रम्प की घोषणा को मीडिया हलक़ों में गंभीरता से नहीं लिया गया था और राजनीतिक टीकाकारों ने इसे ट्रम्प का राजनीतिक स्टंट क़रार दिया था, यहां तक कि कुछ विशेषज्ञों ने तो पहले ही इस बात का संकेत दे दिया था कि ट्रम्प का यह एलान सऊदी अरब से और अधिक पैसे ऐंठने के लिए है।

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मंगलवार को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, हम (सीरिया में) अपना मिशन क़रीब पूरा कर चुके हैं, और क्षेत्र में दूसरों के साथ समन्वय से जल्दी ही कोई फ़ैसला करेंगे।

ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कांफ़्रेंस के दौरान कहा, “सऊदी अरब को हमारे इस फ़ैसले में काफ़ी रूची है, इसलिए मेरा कहना है कि ठीक है, अगर आप चाहते हैं कि हम वहां बने रहें, तो आपको इसका ख़र्च सहन करना पड़ेगा।”

इससे पहले भी ट्रम्प ने न केवल सीरिया से बल्कि मध्यपूर्व से बाहर निकलने की बात कही थी। ट्रम्प ने कहा था, “ज़रा सोचें, 17 वर्षों में 7 ट्रिलियन डॉलर। हमें क्या मिला। मौत और विध्वंस के अलावा कुछ नहीं। यह बहुत डरावनी चीज़ है। इसलिए अब वक़्त आ गया है, यही सही समय है।”

ट्रम्प के कहने और करने में अंतर इसलिए भी लगता है, क्योंकि वे जहां सीरिया और मध्यपूर्व में सैन्य हस्तक्षेप को बंद करने की बात कर रहे हैं, वहीं अमरीकी सेना उत्तरी सीरिया में सैनिकों की संख्या बढ़ा रही है और नई सैन्य चौकियों की स्थापना कर रही है।