अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने म्यांमार सरकार को “रोहिंग्या और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के नरसंहार के लिए दोषी पाया है.

सात सदस्यीय परमानेंट पीपुल्स ट्रिब्यूनल (पीपीटी) के प्रमुख डेनियल फेयरस्टीन ने कहा, “ट्राइब्यूनल ने फैसला सुनाया कि म्यांमार काचिन और मुस्लिम समूहों के लोगों के खिलाफ नरसंहार का दोषी है.

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परमानेंट पीपुल्स ट्रिब्यूनल (पीपीटी) की स्थापना 1 9 7 9 में इटली में हुई थी और इसमें 66 अंतर्राष्ट्रीय सदस्य शामिल है. स्थापना के बाद से, मानव अधिकार और नरसंहार सहित कई मामलों में 43 सत्र आयोजित किए गए हैं.

ट्राइब्यूनल ने मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का अंत करने के लिए म्यांमार सरकार से आह्वान किया. साथ ही कहा, “म्यांमार को रोहिंग्या, काचीन और अन्य समूहों के खिलाफ किए गए अत्याचारों की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र को तथ्य तलाशने के लिए वीजा और मुफ्त पहुंच प्रदान की जानी चाहिए.

बयान में कहा गया है कि सरकार को अपने संविधान में संशोधन करना चाहिए और वंचित अल्पसंख्यकों को अधिकार देने और नागरिकता देने के लिए भेदभावपूर्ण कानूनों को खत्म करना चाहिए.

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