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बांग्लादेश के अस्थायी शरणार्थी शिविरों में रह रहे हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों पर अब मॉनसून का खतरा मंडरा रहा है. इस सबंध में संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी जारी की है. साथ  ही बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की तैयारियों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता की अपील की है.

अंतरराष्ट्रीय आव्रजन संगठन (आईओएम) ने कहा है कि म्यांमार में हिंसा के डर से भाग कर बांग्लादेश के शिविरों में रहने वाले हजारों लोगों के जीवन बिना फंड के खतरे में पड़ जाएगा. लगभग दस लाख रोहिंग्या शरणार्थी कोक्स बाजार इलाके में रहते हैं और उनमें से 25 हजार के बारे में कहा जाता है कि उन्हें भूस्खलन से सबसे अधिक खतरा है.

वहीँ दूसरी और म्यांमार में रोहिंग्याओं के खिलाफ हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है. मानवीय मामलों के समन्वय से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय के प्रमुख मार्क कट्स ने शुक्रवार (27 अप्रैल) रात एएफपी को बताया कि पिछले तीन हफ्तों में चीनी सीमा से सटे म्यांमार के सबसे उत्तरी राज्य काचिन में 4,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं.

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कट्स ने हालिया संघर्षों के बारे में कहा कि हमें स्थानीय संगठनों की तरफ से रिपोर्ट मिली है, जिसमें उनका कहना है कि कई लोग अभी भी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्य रोहिंग्या संकट का आकलन करने के लिए बांग्लादेश और म्यांमार के लिए रवाना हो चुके है.

अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों की समिति बांग्लादेश के लिए उड़ान भरने से पहले शुक्रवार को कुवैत में ठहरी. सिन्हुआ के मुताबिक, इस सप्ताहांत बांग्लादेश में रोहिंग्या शिविरों का दौरा करने के बाद सदस्य सोमवार को म्यांमार की राजधानी पहुंचेंगे

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