mahinda rajapakse afp

बीते दिनों श्रीलंका में मुस्लिम विरोधी दंगों के कारण पुरे देश में आपातकाल लगाना पड़ा था. इस दंगे में अब बड़ा खुलासा हुआ. इस पुरे दंगे के पीछे देश के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की भूमिका सामने आई है.

देश के मध्यवर्ती हिस्से के कैंडी जिला इस महीने की शुरुआत में तीन दिनों तक दंगों की आग में झुलसता रहा. इस दौरान मस्जिदों, मुस्लिमों के घरों, व्यापारिक स्थलों को गैर मुस्लिमों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया.

साथ ही इस हिंसा के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी किये गए. जिसके बाद सरकार को इमरजेंसी लगानी पड़ी थी और इन्टरनेट सर्विस को भी बंद करना पड़ा. हालांकि, राजपक्षे ने इस तरह की घटना में किसी भी प्रकार की भूमिका से इनकार किया है.

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रायटर्स ने पीड़ितों और चश्मदीदों के बयान और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर खुलासा किया है कि पारामिलिट्री फोर्सेज और स्पेशल टास्क फोर्स के अधिकारी मस्जिद के मौलवी से बदसलूकी करते नजर आए हैं. जब इस बारे में लोकल एसटीएफ कमांडर से पूछा गया तो उसने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

ए एच रामीस नाम के एक मौलवी ने रायटर्स को बताया, “मस्जिद में लोग छिपे थे. हमें लग रहा था कि पुलिस के लोग सुरक्षा देने आए हैं लेकिन हुआ ठीक उल्टा. वे लोग हन पर हमला करने आए थे. हम लोगों को गालियां दे रहे थे और चीख-चिल्ला रहे थे.  वे लोग कह रहे थे कि सभी समस्या हम लोगों की वजह से ही है, जैसे कि हम लोग आतंकी हों.”

बता दें कि साल 2015 के चुनावों में इन्हीं वजहों से महिंदा राजपक्षे की हार हुई थी. ऐसे में सांप्रदायिकता का कार्ड खेलकर वे अपने वोट बैंक को मजबूत करने में जुटे हुए है.