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दुनिया भर में सबसे तेजी से फैलने वाला एकमात्र धर्म इस्लाम है. जिसे रोकने के लिए सदियों से कई हथकंडे अपनाए जा रहे है. बावजूद आज भी इस्लाम धर्म को लोग बड़ी शिद्दत के साथ अपना रहे है.

ऐसे में अब इस्लाम धर्म के विरोधियों ने इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है. जिसके चलते मुस्लिमों को पूरी दुनिया में नस्लवादी हमलों का सामना करना पड़ रहा है. बीते दिनों बौद्ध बहुल म्यांमार में और अब श्रीलंका में मुस्लिमों को हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है.

बौद्ध बहुल देश श्रीलंका में बौद्ध-मुस्लिम दंगों की वजह से न केवल आपातकाल लगाना पड़ा, बल्कि तमाम कोशिशों के बावजूद वहां भी हिंसा जारी है. मुस्लिमों के धार्मिक स्थलों और कारोबार को निशाना बनाया जा रहा है.

जानकारों का कहना है कि यह दक्षिण एशिया में चल रहे बौद्ध-मुस्लिम संघर्ष का नतीजा है. अमेरिकी लेखक सेमुअल हटींगटन ने एक बार कहा था भविष्य में राजनीतिक विचारधाराओं के बीच नहीं, बल्कि सभ्यताओं या धर्मो के बीच संघर्ष होगा.

टाइम पत्रिका के अनुसार, इस हिंसा के पीछे सिंहली बौद्ध राष्ट्रवादी संगठन को जिम्मेदार माना गया है. इस संगठन का आरोप है कि कि ‘श्रीलंका में भी बौद्धों पर धर्मातरण का खतरा मंडरा रहा है. सिंहली परिवारों में एक या दो बच्चे हैं, जबकि अल्पसंख्यक ज्यादा बच्चे पैदाकर आबादी का संतुलन बिगाड़ रहे हैं.

बता दें कि बौद्ध धर्मगुरु दिलांथा विथानागे ने दक्षिण एशिया में इस्लाम को रोकने और बौद्धधर्म के उत्थान के लिए बोदु बल सेना (बीबीएस) का गठन किया जिसे ही सिंहली बौद्ध राष्ट्रवादी संगठन माना जाता है.

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