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वाशिंग्टन: सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का अमेरिकी दौरा विवादों में आ गया है. दरअसल इस दौरे के दौरान उन्होंने फिलिस्तीनियों को उजाड़ने वाले यहूदी नेताओं से मुलाकात की है.

बिन सलमान ने जिन समूहों के नेताओं से मुलाक़ात की. उन्होंने फिलिस्तीन की जमीन पर अवैध इजराईल के लाखों यहुदियों को गैरकानूनी तरीके से बसाने के लिए दान दिया है. जिसके खिला फबीडीएस (बॉयकॉट, डिवएस्टमेंट एंड सेंक्शन) लड़ाई लड़ रहा है.

बिन सलमान के साथ मुलाक़ात में एआईपीएसी के अधिकारी, स्टैंड अप फॉर इज़राइल (एडीएल) और उत्तरी अमेरिका के यहूदी संघ (जेएफएनए) शामिल हुए. हेट्ज़ (Haaretz) के रिपोर्ट के अनुसार, राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान बनी ब्रीथ और अमेरिकी यहूदी समिति (एजेसी) के सम्मेलन से नेताओं से भी मिले.

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A picture taken on December 13, 2017, shows the Israeli and US flags placed on the roof of an Israeli settlement building in East Jerusalem and Jerusalem’s Old City with the Dome of the Rock mosque in the centre. / AFP PHOTO / AHMAD GHARABLI

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एआईपीएसी, एडीएल और जेएफएनए ने लंबे समय तक बीडीएस (बॉयकॉट, डिवएस्टमेंट एंड सेंक्शन) को टार्गेट किया है, एक अहिंसक आंदोलन जो इजरायल को समान अधिकार और फिलीस्तीनियों को लौटने का अधिकार प्रदान करने के लिए आर्थिक रूप से दबाव बनाने की कोशिश करता है.

ध्यान रहे सऊदी अरब आधिकारिक तौर पर इज़राइल को मान्यता नहीं देता है, लेकिन विश्लेषकों ने बार-बार कहा है कि राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान की ओर से बदलाव का संकेत दिया कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों को गर्म करने के इच्छुक है.

कतर विश्वविद्यालय में खाड़ी अध्ययन कार्यक्रम के निदेशक महजुब जवेरी ने कहा कि राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान की यात्रा “एक जनसंपर्क अभियान था जिसका लक्ष्य अमेरिका के लिए सउदी किंगडम का एक नया चेहरा है, जो कि लचीला और बदलने के लिए तैयार था.”