वॉशिंगटन: ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को दावा किया कि 2017 में भारत में सरकार के आलोचक रहे मीडिया संस्थानों पर कथित तौर पर दबाव बनाया गया या उन्हें परेशान किया गया.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2017 के लिए अपनी सालाना मानवाधिकार रिपोर्ट में कहा, ‘भारत का संविधान अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन इसमें प्रेस की स्वतंत्रता का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है. भारत सरकार आमतौर पर इन अधिकारों का सम्मान करती है, लेकिन कुछ ऐसे मामले भी हुए हैं, जिनमें सरकार ने अपने आलोचक मीडिया संस्थानों को कथित रूप से परेशान किया और उन पर दबाव बनाया.’

इस रिपोर्ट में दुनिया के सभी देशों में मानवाधिकार की स्थिति का जिक्र किया गया है. हालांकि इस सालाना रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत में मानवाधिकार की स्थिति काफी बेहतर है.

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ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, ‘कभी-कभी उन नागरिकों पर मुकदमा चलाने के लिए राजद्रोह और आपराधिक मानहानि कानूनों का इस्तेमाल किया गया, जिन्होंने सरकारी अधिकारियों की आलोचना की थी या राज्य नीतियों का विरोध किया था.’

रिपोर्ट में 54 पत्रकारों पर 54 कथित हमलों, जिनमें कम से कम तीन मामले समाचार चैनल को प्रतिबंधित करने के, 45 इंटरनेट बंद करने के और 45 राजद्रोह के व्यक्तियों और समूहों से संबंधित मामलों का जिक्र है.

रिपोर्ट में उदाहरण के तौर पर एनडीटीवी पर सीबीआई के छापे, अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक पद से बॉबी घोष की विदाई, कार्टूनिस्ट जी. बाला की गिरफ्तारी का जिक्र किया गया है.  रिपोर्ट में कर्नाटक की पत्रकार गौरी लंकेश और त्रिपुरा की शांतनु भौमिक की हत्या का भी उल्लेख है.

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