मस्जिदुल अक़्सा और फीलीस्तीन की नमाज़ी जनता यरूश्लेम पर इस्राईल के अवैध कब्जे के बाद हजारो बार आक्रमणकारियों के अपराध और हिंसक हमलों का शिकार हुई है।

प्रमुख रूप से इन अपराधो और उल्लंघनो मे मंत्रियो, कानेट प्रतिनिधियो, पुलिस अधिकारीयो और इस्राईल मे बसने वालो का मस्जिद मे प्रवेश करना और इस पवित्र जगह में तिलमूदी अनुष्ठान समारोह आयोजित करने के उनके प्रयास है जिन्होने फिलिस्तीनी जनता की भावनाओ को नुकसान पहुंचाया है।

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1967 से लेकर अब तक इस्राईल के मस्जिदुल अक़्सा पर हमले:

7 जून 1967: जनरल “मुर्दख़ाई जूर” ने सैन्य कमांडरो सहित अल-अक़्सा मस्जिद में प्रवेश करके इज़राइली ध्वज कुब्बा अल-सखरा पर लहराया और उसके पश्चात कुरान की लीपियो को आग के हवाले कर दिया और फिलीस्तीनियों को नमाज पढ़ने से रोका, और अल-अक्सा मस्जिद के द्वार भी चाबीया भी जब्त कर ली।

15 जून 1967: इस्राईली सेना प्रमुख रब्बी शलूमर गोरान ने अपने 50 अनुयायियों के साथ मस्जिदुल अक़्सा मे प्रवेश करके वहा पर तिल्मूदी अनुष्ठान समारोह आयोजित किया।

1968: इस्राईल ने यरूशलेम में फिलीस्तीनी भूमि को जब्त करने का आदेश पारित करते हुए यह दावा किया गया कि यह भूमि सरकारी भूमि का हिस्सा है, जबकि यह भूमि फिलिस्तीनीयो से संबंध रखती थी।

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