Sunday, September 26, 2021

 

 

 

अमेरिकी ऑफीसर का बयानः भारत के शीर्ष नेतृत्व को उग्र बयानों के खिलाफ बोलना चाहिए

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धार्मिक स्वतंत्रता पर एक अमेरिकी आयोग की एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि भारत के शीर्ष नेतृत्व को उग्र बयान के खिलाफ कहीं अधिक प्रखरता से बोलना चाहिए।

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धार्मिक स्वतंत्रता पर एक अमेरिकी आयोग की एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि भारत के शीर्ष नेतृत्व को उग्र बयान के खिलाफ कहीं अधिक प्रखरता से बोलना चाहिए। भारत द्वारा उन्हें एक स्वतंत्र संस्था की सदस्य के तौर पर वीजा जारी करने से इनकार किए जाने को उन्होंने एक बड़े अवसर को गंवाया जाना बताया है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) की आयुक्त कैटरीना लांटोस स्वेट ने कहा कि भारत एक सौ पच्चीस करोड़ की आबादी वाला दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। उन्हें अब मानवाधिकारों के संरक्षण पर गौर करने वाले अमेरिकी आयोग के आयुक्तों और पेशेवरों को इजाजत देने में कुछ रक्षात्मक होना चाहिए, लेकिन मेरे विचार से इससे कमजोरी जाहिर होती है न कि मजबूती। लांटोस स्वेट ने कहा, ‘मैं इसे कुछ-कुछ समझ से परे और भारत की ओर से एक शानदार अवसर गंवाने के रूप में पाती हूं।’

साल 2001 और 2009 के बाद यह तीसरा मौका है, जब भारत यूएससीआईआरएफ के सदस्यों को वीजा जारी करने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि भारत एक महान समाज है और दुनिया के सर्वाधिक महत्वपूर्ण देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि किसी को भी यह आशा करनी चाहिए कि भारत जैसा एक लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाज आयोग की यात्रा का स्वागत करेगा। भारत सरकार द्वारा लिया गया फैसला रक्षात्मक है।

लांटोस स्वेट ने कहा कि कुछ भारतीय राज्यों में बहुत ही जटिल कानून हैं और धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति साम्प्रदायिक हिंसा बड़ी चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि अगर उग्र बयानों के खिलाफ शीर्ष नेतृत्व कहीं अधिक प्रखर हो तो वे इसका स्वागत करेंगे। यह आयोग एक स्वतंत्र सरकारी आयोग है जिसके आयुक्तों को अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस के दोनों सदनों के नेता नियुक्त करते हैं।

हालांकि, एक सवाल के जवाब में लांटोस स्वेट ने धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए कुछ बयानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ‘हम उसका स्वागत और सराहना करते हैं। लेकिन यह कहना उचित होगा कि हमें लगता है कि वह कहीं अधिक कर सकते हैं।’ (Jansatta)

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