संयुक्त राष्ट्र के एक भाषण में, पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान ने भारत सरकार को इस्लाम के खिलाफ नफरत और पक्षपात का प्रायोजक कहा। हालांकि इस दौरान यूएन के असेंबली हॉल में उस वक्त मौजूद भारतीय विदेश सेवा के 2010 बैच के अफसर मिजितो विनितो उठकर बाहर चले गए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को शुक्रवार को संबोधित करते हुए, खान ने कहा कि इस्लामोफोबिया आज भारत में व्याप्त है और वहां रहने वाले लगभग 200 मिलियन मुसलमानों को धमकी देता है। उन्होने कहा, “दुनिया का एक देश आज जहां, मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है, कि राज्य इस्लामोफोबिया का प्रायोजक है, भारत है। इसके पीछे कारण आरएसएस की विचारधारा है जो दुर्भाग्य से आज भारत पर शासन करती है। उन्होने कहा, “वे मानते हैं कि भारत हिंदुओं के लिए अनन्य है और अन्य समान नागरिक नहीं हैं।”

इमरान खान ने अपनी स्पीच कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) गांधी और नेहरू के सेक्युलर मूल्यों को पीछे छोड़ रहे हैं। वे भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में जुटे हैं। इनका मानना है कि भारत केवल हिंदुओं के लिए है। आरएसएस ने 1992 में बाबरी मस्जिद ढहा दी।’’ उन्होंने गुजरात दंगे का भी जिक्र किया। कहा कि 2002 के दंगे में मुस्लिमों की हत्या की गईं। कोरोनावायरस फैलाने के लिए भी मुस्लिमों को टारगेट किया गया। साथ ही कहा कि जम्मू-कश्मीर में भारत ने गैरकानूनी तरीके से विशेष राज्य का दर्जा छीना।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में लोगों को फेक एनकाउंटर में मारा जा रहा है। पिछले साल अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीरी नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। कई कश्मीरियों को मारा गया, पूरे राज्य में कर्फ्यू लगा दिया गया। इंटरनेशनल कम्युनिटी को इसकी जांच करनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी जम्मू-कश्मीर में डेमोग्राफिक चेंज कर रही है। जेनेवा कन्वेंशन के मुताबिक, ऐसा करना वॉर क्राइम है।

दूसरी और यूएन में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस त्रिमूर्ति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की 75वीं महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बयान कूटनीतिक तौर पर बेहद निचले स्तर का था। उन्होंने झूठे आरोप लगाए और व्यक्तिगत हमले किए। पाकिस्तान अपने देश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे जुल्म और सीमा पार से आतंक फैलाने की कोशिशों को ढंकने की कोशिश कर रहा है। राइट ऑफ रिप्लाई में इसका सही जवाब दिया जाएगा।

वहीं संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 45वें सेशन में भारत के स्थाई मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी सेंथिल कुमार ने पाकिस्तान में जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों की बदतर स्थिति के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा, ‘दूसरों को उपदेश देने से पहले पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि आतंकवाद मानवाधिकार उल्लंघन का सबसे बदतर तरीका है। यह मानवता के खिलाफ अपराध है। दुनिया को मानवाधिकार पर ऐसे देश से सीख लेने की जरूरत नहीं है, जो आतंक का एपिसेंटर और नर्सरी के तौर पर जाना जाता है।’

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