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अमेरिका की धमकियों के बाद भारत के तेवर अब नरम पढ़ते जा रहे है। इस मामले मे  व्यापक चर्चा के लिए अमेरिका का एक प्रतिनिधि मंडल जल्द ही दिल्ली पहुंचने वाला है। तो भारत ने भी संकेत दे दिया है कि वह ईरान के साथ तेल खरीद में बड़ी कटौती को तैयार है।

दूसरी और ईरान ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर ऐसा होता है तो वह फ़ार्स खाड़ी में स्थित जनसन्धि स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ को बंद कर देगा। जिसके बहुत ही गंभीर परिणाम होंगे और क्षेत्रीय देश भी अपना तेल निर्यात नहीं कर सकेंगे। ग़ौरतलब है कि सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब इमारात, कुवैत और इराक़ का अधिकांश तेल स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ से होकर ही विश्व बाज़ार तक पहुंचता है। इसके अलावा, क़तर विश्व में सबसे अधिक एलएनजी गैस का निर्यात करता है, जो इसी मार्ग से होकर विश्व मार्केट तक पहुंचती है।

गुरुवार को ही ईरान की इस्लामी क्रांति की सेना आईआरजीसी के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ या सबके लिए है या किसी के लिए भी नहीं। हालांकि अमरीका ने दावा किया है कि फ़ार्स खाड़ी के देशों से तेल के निर्यात को सामान्य रूप से जारी रखने के लिए वह स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ में सुरक्षा को सुनिश्चित बनाएगा।

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स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ से प्रतिदिन 14 तेल टैंकर होकर गुज़रते हैं, जिसका मतलब है कि 1 करोड़ 70 लाख बैरल तेल प्रतिदिन इस मार्ग से होकर विश्व मार्केट में पहुंचता है, जो क़रीब विश्व के तेल निर्यात का 50 प्रतिशत है। अगर इस मार्ग से तेल निर्यात में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है तो विश्व में तेल की ज़रूरत का 40 से 50 प्रतिशत भाग निर्यात नहीं हो पाएगा।

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भारत की दूसरी परेशानी चाबहार बंदरगाह भी है। यह बंदरगाह अफगान नीति और एशिया में लंबी अवधि की रणनीतिक जरूरत को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि अमेरिका की तरफ से चाबहार पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है। अमेरिकी सरकार ने हाल ही में यह जरूर कहा है कि वह ईरान के साथ कारोबार पर लागू प्रतिबंध में किसी भी तरह की छूट देने के पक्ष में नहीं है।

इतना ही नहीं अमेरिका की तरफ से ईरान के साथ हर तरह के कारोबार पर प्रतिबंध लगने से सिर्फ भारत के तेल आयात पर ही नहीं बल्कि ईरान को भारतीय निर्यात पर भी असर होगा। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक , ईरान भारत से बड़े पैमाने पर लौह अयस्क आदि खरीदता है। वर्ष 2017-18 में ईरान ने भारत से 13.8 करोड़ डॉलर का स्टील खरीदा था। इस वर्ष के पहले दो महीनों में 80 लाख डॉलर का आयात ईरान ने किया है।

इसी तरह से भारतीय वाहनों की मांग भी हाल के वर्षो में ईरान में बढ़ी है। पिछले वर्ष भारत ने ईरान को 4.32 करोड़ डॉलर के वाहन बेचे थे, जो इस वर्ष अभी तक 20 लाख डॉलर के हैं।

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