केंद्र की मोदी सरकार को स्‍व‍िटजरलैंड के बैंकों से काला धन लाने के मामले में बड़ा झटका लगा है. स्‍व‍िटजरलैंड की प्रमुख राजनितीक पार्टी ने भारत को भ्रष्ट करार देते हुए ब्लैकमनी के डाटा को साझा करने का विरोध किया है.

स्विट्जरलैंड की प्रमुख दक्षिणपंथी पार्टी स्विस पीपल्स पार्टी (एसवीपी) ने भारत समेत 11 देशों को “भ्रष्ट और तानाशाही वाले देश” बताकर टैक्स फ्राड से जुड़े डाटा देने का विरोध किया है. इन देशों में भारत, अर्जेंटिना, ब्राजील, चीन, रूस, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, कोलंबिया, मेक्सिको, दक्षिण अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल है.

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एसवीपी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल्बर्ट रोस्टी ने कहा कि हम नहीं चाहते कि भ्रष्ट और अधिनायकवादी देशों को बैंकों का डाटा दिया जाए. क्योंकि इन देशों को ये डाटा देने पर वहां के भ्रष्ट टैक्स अधिकारी ग्राहकों का धमकाने और ब्लैकमेल करने के लिए करेंगे.

जानकारों का मानना है कि पनामा लीक के बाद भारत द्वारा दोषियों पर कोई कदम न उठा पाना भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है. एसवीपी के इस दावे को स संसद में कई अन्य दलों का का समर्थन प्राप्त है.

भारत और स्विट्जरलैंड ने 22 नवंबर 2016 को समझौता किया था कि वो 2018 से बैंक डाटा इकट्ठा करना शुरू करेंगे और 2019 में एक-दूसरे से इसे साझा करेंगे। दोनों देशों ने एक दूसरे को लिखित भरोसा दिया है कि इस डाटा का प्रयोग केवल टैक्स चोरी से जुड़े मामलों की जांच में किया जाएगा।

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