फिलिस्तीन मुद्दें को लेकर नेशनल पैंथर्स पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि मोदी को महान भारतीय सभ्यता के प्रधानमंत्री के रूप में फिलिस्तीन का साथ देना चाहिए. उन्होंने कहा कि 1948 में भारत ने फिलस्तीन के विभाजन का जोरदार विरोध किया था.

उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और ईरान दोनों ही देश थे, जिन्होंने फिलस्तीन विभाजन का विरोध किया और इस प्रकार यहूदी राज्य का निर्माण हुआ. भीमसिंह ने कहा कि इजराइल फिलस्तीन के खिलाफ कहर परपा रहा है और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन करके फिलिस्तीन के लगभग एक-तिहाई क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया है, जिसमें दूसरे नंबर पर प्रस्ताव संख्या 242, 338 हैं.

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भीमसिंह ने कहा कि इजराइल को कम से कम संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुसार यरूशलम खाली करना चाहिए और मस्जिद.-ए-अल-अक्सा के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है, जो दुनिया में मुसलमानों के सर्वोच्च पूजा स्थलों में से एक है.

पिछले हफ्ते यरूशलम में मस्जिद-ए-अल-अक्सा पर इजरायल के आक्रमण की निंदा की करते हुए उन्होंने कहा कि यह फिलस्तीन के मामलों में गंभीर हस्तक्षेप और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव सं. 181, 242, 338 का खुल्लमखुला उल्लंघन है.

उन्होंने कहा कि यरूशलम फिलस्तीनियों का है और इजरायली सेना को वापस जाना होगा. उन्होंने भारत के नेतृत्व और ईरान सहित अन्य इस्लामी देशों से सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाए जाने की मांग करने की अपील की

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