पाकिस्तान में 29 साल के एक मुस्लिम व्यक्ति को इस्लाम धर्म त्यागकर यहूदी धर्म अपनाने की इजाजत मिल गई हैं. 29 साल के फिशेल बेनखाल्द नामक इस युवक ने राष्ट्रीय पहचान पत्र और पासपोर्ट के लिए आवेदन करते वक्त अपने धर्म के कॉलम में यहूदी लिखने की इजाजत मांगी थी.

एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने हाल ही में फिशेल के उस आग्रह को स्वीकृति प्रदान की जिसमें उसने यहूदी धर्म का उल्लेख करने को लेकर इजाजत मांगी थी. पाकिस्तान में मुस्लिम होकर आवदेन के धर्म के कॉलम में किसी दूसरे धर्म का उल्लेख करना स्वधर्म त्याग माना जा सकता है और जिसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है.

फिशेल 1987 में कराची में पैदा हुए थे. उनके पिता मुस्लिम और यहूदी मां हैं. पिता के धर्म की वजह से उनका धर्म भी दस्तावेजों में इस्लाम लिखा गया. लेकिन, उन्होंने बीते साल एनएडीआरए को आवेदन देते हुए कहा था कि वह अपनी इच्छा से यहूदी बनना चाहता है. एनएडीआरए ने इसके बाद गृह मंत्रालय से राय मांगी थी.

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मंत्रालय ने कहा है कि आवेदक को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की इजाजत देनी चाहिए. वहीँ जेयूआइ-एफ के सीनेटर और धार्मिक विद्वान मुफ्ती अब्दुल सत्तार ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि एक बच्चा अपने माता-पिता का धर्म मानने के लिए बाध्य नहीं होता.

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