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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि वह अमेरिका को बंदूक चलाने के लिए अपने कंधे के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देंगे।

गुरुवार को वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मैं ऐसा रिश्ता बिल्कुल नहीं चाहता हूं जिसमें पाकिस्तान को भाड़े की बंदूक की तरह इस्तेमाल किया जाए- किसी और का युद्ध लड़ने के लिए हमें पैसे दिए जाए। हम खुद को दोबारा ऐसी स्थिति में नहीं आने देंगे। इससे ना केवल कई जिंदगियां तबाह होती हैं बल्कि हमारे इलाकों का विनाश होता है और हमारी गरिमा भी खत्म होती है। हम अमेरिका के साथ सम्मानजनक रिश्ता चाहते हैं।’ उनका इशारा अमेरिका के आतंक के खिलाफ जारी युद्ध की तरफ था।

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इमरान ने कहा, ‘इससे हमें न सिर्फ इंसानी जानों का नुकसान हो रहा है, हमारे कबायली इलाके भी बर्बाद हो रहे हैं बल्कि इससे हमारी गरिमा पर भी प्रहार हो रहा है।’ अमेरिका के साथ आदर्श रिश्तों की प्रकृति कैसी हो, यह पूछे जाने पर खान ने कहा, ‘उदाहरण के लिए चीन के साथ हमारे रिश्ते एक पक्षीय नहीं हैं। यह दो देशों के बीच कारोबारी रिश्ता है। हम अमेरिका के साथ भी ऐसा रिश्ता चाहते हैं।’

क्रिकेटर से राजनेता बने खान ने खुद के ‘अमेरिका विरोधी’ होने की बात को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी नीतियों के साथ असहमति उन्हें अमेरिका विरोधी नहीं बनाती है। उन्होंने कहा, ‘यह बेहद साम्राज्यवादी रवैया है। आप या तो मेरे साथ हैं या मेरे खिलाफ।’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह चाहेंगे कि पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में गर्माहट आए, खान ने कहा, ‘कौन महाशक्ति का दोस्त नहीं होना चाहेगा।’

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इस दौरान उन्होंने अमेरिका के पाक में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारने के ऑपरेशन की आलोचना की। पाकिस्तानी पीएम ने कहा, ‘अपने देश में कब और किसने ड्रोन अटैक की अनुमति दी है। आप एक हमले के साथ एक आतंकी को मारते हैं और उसके साथ 10 दोस्त और पड़ोसी। क्या कभी ऐसा कोई मामला हुआ है जहां कोई देश अपने ही सहयोगी के बम अटैक का शिकार बने। जाहिर है कि मैंने इसका विरोध किया और इससे अमेरिका के खिलाफ भावनाएं भड़कीं।’

इमरान ने कहा, अगर हम 9/11 के हमले के बाद उदासीन रहे होते तो हमने खुद को बर्बादी से बचा लिया होता। आतंक के खिलाफ अमेरिका की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के बाद पाकिस्तान नरक बनकर रह गया। युद्ध में हमारे 80,000 लोग मारे गए और अर्थव्यवस्था का करीब 150 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान पहुंचा। निवेशक और विदेशी खिलाड़ी आना बंद हो गए. दुनिया में पाकिस्तान सबसे खतरनाक जगह के तौर पर बदनाम हो गया।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में 27 लाख अफगान शरणार्थी है। हो सकता है कि 2000 से 3000 तालिबान पाक में आ गए हो और वे अफगान शरणार्थी कैंप में रह रहे हों। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के सवाल पर इमरान खान ने कहा, ‘मैं कई सालों से कहता रहा हूं कि अफगानिस्तान का कोई सैन्य हल नहीं है लेकिन उन्होंने मुझे तालिबान खान कहा। अफगान तालिबान के साथ अमेरिका की वार्ता पर इमरान खान ने कहा कि वह इस कदम का स्वागत करते हैं लेकिन वह नहीं चाहते हैं कि यूएस 1989 की तरह जल्दबाजी में अफगानिस्तान छोड़े। इमरान ने कहा, हम  अफगानिस्तान में अशांति नहीं चाहते हैं, इस बार समझौता होना चाहिए। 1989 के बाद अशांति की वजह से तालिबान उभरा’

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