रियाद- ट्रम्प द्वारा 5 दिसम्बर को लिए हुए फैसले से जहां पूरा अरब लीग अमेरिकी प्रशासन की निंदा कर रहा है तो वहीं सऊदी अरब द्वारा की हुई निंदा को कई लोगों का मानना है की वह बस गुमराह कर रहे हैं, उन्होंने इसराइल फैसले पर ट्रम्प को हरी झंडी दिखा दी है.

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के अनुसार मक्का और मदीना की ग्रैंड मस्जिद के इमाम ने शुक्रवार के उपदेशो में जेरुसलम और अल-अक्सा मस्जिद का कोई जिक्र नहीं किया है, जेरुसलम में स्थित अल-अक्सा मस्जिद को इस्लाम में मक्का-मदीना की ग्रैंड मस्जिदों के बाद सबसे पवित्र स्थल माना जाता है.

उन्होंने कहा था की राज्य ने “आशीर्वादित फिलीस्तीनी लोगों के कानूनी अधिकारों को दोहराया” और इस्लाम और मुसलमानों के लिए सर्वोत्तम पाने के लिए राजा सलमान और अन्य मुस्लिम नेताओं का स्वागत किया, प्रसिद्ध शेख माहेर मुकाइली ने मक्का में शुक्रवार प्रवचन में जेरुसलम मुद्दे का उल्लेख नहीं किया. शेख अब्दुल्ला अल-बेजान, जिन्होंने मदीना में पैगंबर के मस्जिद में शुक्रवार को भाषण दिया,उन्होने भी इस मुद्दे का बिल्कुल भी उल्लेख नहीं किया, जबकि उन्होंने पूरे साल मौसम में परिवर्तन के बारे में और ऊपर वाले के चमत्कारों के बारे में चर्चा की थी.

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इसराइल टीवी ने भी दावा दिया था की जेरूसलम के फैसले पर सऊदी रॉयल कोर्ट ने स्थानीय मीडिया को इस इश्यू का कवरेज नहीं करने का आदेश दिया था, अम्मान के सऊदी और बहरीन एम्बेसी ने भी जॉर्डन में रहने वाले अपने नागरिकों से कहा कि वह अमेरिका आंदोलन के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लें.

हालाँकि अरब समुदाय व कई अंतरराष्ट्रिय समुदाय ने इस फैसले की निंदा की है.

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