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फ़िलिस्तीन को लेकर मिस्र के मुफ़्ती शूक़ी अल्लाम ने कहा कि फ़िलिस्तीन मामले की अनदेखी वास्तव में इस्लामी जगत केे साथ विश्वासघात है.

अल्लाम ने एक कांफ़्रेंस में कहा है कि एेसा न हो कि वर्तमान समय में क्षेत्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर घटने वाली घटनाएं, फ़िलिस्तीन मामले के अनेदखा करने का कारण बनें.  उनका कहना है कि फ़िलिस्तीन मामले की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.

मिस्र के मुफ़्ती ने कहा कि बैतुल मुक़द्दस का विषय, मुसलमानों का धार्मिक विषय है अतः उनको हर प्रकार के मतभेद से बचते हुए बैतुल मुक़द्दस की स्वतंत्रता के लिए प्रयास करने चाहिए. उन्होंने कहा कि इस्राईल ने बैतुल मुक़द्दस सहित फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों का अतिग्रहण कर रखा है जबकि इस बात के एेतिहासिक प्रमाण पाए जाते हैं कि उसको इसका अधिकार नहीं है.

4 और फ़िलिस्तीनी इस्राईली सैनिकों की बर्बरता का निशाना बन कर शहीद हुए

इसी बीच फिलिस्तीन से खबर है कि वतन वापसी के अधिकार रैली पर इस्राईली सैनिकों के हमले में 4 और फ़िलिस्तीनी शहीद हो गए. फ़िलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार की रात बताया कि वतन वापसी के अधिकार की महारैली में जो चौथे शुक्रवार को आयोजित हुयी, 4 फ़िलिस्तीनी शहीद और 645 अन्य घायल हुए.

बता दें कि 30 मार्च से 20 अप्रैल तक इस शांतिपूर्ण रैली पर ज़ायोनी सैनिकों की फ़ायरिंग में, 40 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी शहीद और 4000 से ज़्यादा घायल हुए हैं. फ़िलिस्तीनियों की यह रैली 30 मार्च 1976 को फ़िलिस्तीनियों की भूमि के इस्राईल द्वारा हड़पे जाने की दुखद घटना की याद दिलाती है.

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