Monday, November 29, 2021

कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन, संयुक्त राष्ट्र संघ ने जांच पर दिया जोर

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संयुक्त राष्ट्र संघ ने गुरुवार को कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट जारी करने के साथ ही ऐसे मामलों की अंतरराष्ट्रीय जांच कराए जाने की भी जरूरत बताई। हालांकि भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रिपोर्ट पूरी तरह से पूर्वाग्रह से प्रेरित है और गलत तस्वीर पेश करने का प्रयास कर रही है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह देश की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी रिपोर्ट में भारत के साथ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को भी शामिल किया है। इसमें दोनों ही क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता ज़ताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ रहने वाले लोग पीड़ित हैं। उन्हें या तो अधिकार दिए ही नहीं जा रहे हैं या फिर बेहद सीमित ही हासिल हो रहे हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए जल्द से जल्द अंतरराष्ट्रीय दख़ल की ज़रूरत है।’

रिपोर्ट में पाकिस्तान से ख़ास तौर पर कहा गया है कि वह ‘आतंक-निरोधक कानून के दुरुपयोग पर जल्द लगाम लगाए। इसके जरिए शांतिपूर्ण तरीकों से अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है।’

वहीं भारत के मामले मे संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था के प्रमुख जैद राद अल हुसैन ने ‘जुलाई 2016 से हुई सभी नागरिक मौतों’ की जांच की मांग की है। अल हुसैन ने कहा कि भारत सरकार को जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा शक्ति के अत्यधिक इस्तेमाल और पैलेट गनों के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

जैद राद अल हुसैन ने मानव अधिकार परिषद से मांग की है कि कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की जांच के लिए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग बनाई जाए।

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