पाकिस्तान की यात्रा पर पहुंचे संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने इस्लामोफ़ोबिया को लेकर चिंता जताते हुए नफ़रत भरे भाषणों को इस्लामोफ़ोबिया का सबसे बड़ा हथियार करार दिया है।

दरअसल, एंतोनियो से सवाल किया गया कि इस्लामोफ़ोबिया एक वैश्विक मुद्दा है। पश्चिम इस्लाम और मुसलमान से क्यों डरा हुआ है? इस पर उन्होने कहा कि इस्लामोफ़ोबिया को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम देख रहे हैं कि अपना समर्थन बढ़ाने के लिए नेता प्रवासियों या शरणार्थियों पर हमला करवाते हैं। कई बार यह धार्मिक नफ़रत के रूप में होता है। ऐसे में हमें इस्लामोफ़ोबिया से मज़बूती से लड़ने की ज़रूरत है।

उन्होने कहा, नफ़रत भरा भाषण इस्लामोफ़ोबिया का सबसे अहम उपकरण है। हमने हेट स्पीच को रोकने के लिए कई चीज़ें शुरू की हैं। इस्लामोफ़ोबिया को हथियार बनाकर वोट हासिल करने की कोशिश की जाती है। सत्ता हासिल करने के लिए लोगों को आपस में बाँटा जा रहा है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है। हमारा फ़र्ज है कि अंतरधार्मिक संवादों को बढ़ावा दें ताकि धार्मिक सद्भावना बढ़े। इसी सिलसिले में मैं करतारपुर कॉरिडोर जाने वाला हूं।

बता दें कि इस्लामोफ़ोबिया से लड़ने के लिए पाकिस्तान, मलेशिया, ईरान और तुर्की एक जुट हुए है। इन देशों ने एक अंग्रेजी टीवी चैनल (English TV Channel) खोलने की तैयारी की है जिसमें इस्लामोफोबिया (Islamophobia) के विषय में जानकारी दी जाएगी।

हाल ही में पाक पीएम इमरान खान ने बताया था कि पाकिस्तान, तुर्की (Turkey) और मलेशिया (Malaysia) मिलकर एक अंग्रेजी चैनल (English Channel) की शुरूआत करने जा रहे हैं। इस चैनल के जरिए दुनिया में इस्लाम के प्रति पैदा हो रहे डर ‘इस्लामोफोबिया’ के कारण बढ़ रही चुनौतियों का सामना करने और इस्लाम के विषय में दुनिया को बताने का काम किया जाएगा।

इमरान खान ने ये भी लिखा है कि इस्लाम धर्म के प्रति लोगों की गलत अवधारणा उनको इस धर्म के खिलाफ लेकर जा रही है। इसको गलत अवधारणा को दूर किया जाएगा। ईश निंदा के मुद्दे को सही प्रकार से समझाया जाएगा। मुस्लिम इतिहास पर फिल्म और सीरीज बनाई जाएगी। जिससे हम अपने लोगों को इस धर्म के विषय में सही ज्ञान दे।

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