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8 नवंबर को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले के पीछे अमेरिका था. इस बात का दावा जर्मन अर्थशास्त्री नॉर्बर्ट हैरिंग ने किया हैं.

हैरिंग ने दावा किया कि भारत में नोटबंदी फैसले के चार हफ्ते पहले यूएसएआईडी ने कैटलिस्ट नाम की स्कीम शुरू की जिसका उद्देश्य, भारत में कैशलेस पेमेंट्स को बढ़ावा देना था. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सामरिक साझेदारी की घोषणा करते हुए भारत के साथ बेहतर विदेश नीतियों को बढ़ावा देने का जोर दिया था. समें चीन पर लगाम कसने की बात भी थी.

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हैरिंग के अनुसार, इस साझेदारी के बारे में अमेरिकी सरकार की विकास एजेंसी यूएसएआईडी ने भारतीय वित्त मंत्रालय के साथ सहयोग समझौतों पर बातचीत की थी. उन्होंने कहा कि कैटलिस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आलोक गुप्ता हैं जो वॉशिंगटन के वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट के सीओओ रहे हैं। वह उस टीम का हिस्सा भी रहे हैं जिन्होंने भारत में आधार सिस्टम को डिवेलप किया.

उन्होंने आगे बताया, 14 अक्टूबर की प्रेस स्टेटमेंट कहती है कि कैटलिस्ट यूएसएआईडी और वित्त मंत्रालय की बीच साझेदारी का अगला दौर है. लेकिन अब यूएसएआईडी की वेबसाइट पर मौजूद प्रेस रिलीज में यह स्टेटमेंट अब दिखाई नहीं देता. लेकिन पहले नीरस दिखाई देने वाला यह बयान उस वक्त सच साबित हुआ जब 8 नवंबर को भारत में नोटबंदी का आदेश लागू हुआ.

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