फ्रांस की संसद का निचला सदन एक सुरक्षा विधेयक पर बहस शुरू करने वाला है। जो ऐसे लोगों को कारावास की अनुमति देगा जो “नुकसान पहुंचाने के इरादे से” पुलिस अधिकारियों की तस्वीरें प्रकाशित करते हैं।

फ्रांस के मानवाधिकार सहित आलोचकों का कहना है कि इस फैसले से प्रेस की स्वतंत्रता को धक्का लगेगा।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन की पार्टी के सांसदों द्वारा प्रस्तावित कानून के तहत इस तरह की तस्वीर प्रकाशित करने पर एक साल की जेल और 53,000 डॉलर के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि मैक्रोन की पार्टी को नेशनल असेंबली में बहुमत है।

यह बिल ऐसे समय में आया है जब फ्रांसीसी सरकार की दुनिया भर में इस्लामी केंद्रों पर कार्रवाई और राष्ट्रपति मैक्रोन और उनकी पार्टी द्वारा इस्लाम विरोधी बयानों के लिए आलोचना की गई है।

फ्रांस के मानवाधिकार लोकपाल, क्लेयर हेडन ने कहा कि बिल में “मौलिक अधिकारों को कम करने के महत्वपूर्ण जोखिम” शामिल हैं, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है। उन्होने कहा, “पुलिस हस्तक्षेप से संबंधित छवियों का प्रकाशन वैध और लोकतांत्रिक कामकाज के लिए आवश्यक है।”

पत्रकारों की यूनियनों और अधिकारों के प्रचारकों ने मंगलवार को नेशनल असेंबली के सामने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। नेशनल असेंबली अगले सप्ताह बिल पर मतदान करने वाली है।

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