तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने अपनी गुमराह नीतियों के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की भी आलोचना करते हुए कहा कि फ्रांस अपने राष्ट्रपति के परिणामस्वरूप बेहद खतरनाक दौर से गुजर रहा है।

एर्दोआन ने कहा, “मैक्रॉन फ्रांस के लिए मुसीबत है। फ्रांस के लिए मेरी इच्छा जल्द से जल्द मैक्रॉन से छुटकारा पाने की है। अन्यथा, उन्हें लंबे समय तक प्रदर्शनकारियों से निपटना होगा।”

इस्तांबुल में हागिया सोफिया ग्रैंड मस्जिद के सामने पत्रकारों से बात करते हुए, एर्दोआन ने कहा कि वह अपने अज़रबैजान समकक्ष, राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के सुझाव से सहमत हैं। जिन्होंने फ्रांस से अर्मेनियाई लोगों को मार्सिले देने के लिए कहा था, अगर वे उसकी संप्रभुता को लेकर उत्सुक हैं।

फ्रांस की नेशनल असेंबली ने गुरुवार को सरकार को नागोर्नो-काराबाख को “गणतंत्र” के रूप में मान्यता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। हालांकि अजरबैजान की संसद ने फ्रांस के इस कदम की पहले ही सख्त आलोचना की थी। और कहा था कि वह फ्रांस की सीनेट को प्रस्ताव को अपनाने के लिए दंडित करने के लिए नागोर्नो-कराबाख संघर्ष में अपनी मध्यस्थता की भूमिका को छीन ले।

वहीं तुर्की और फ्रांस के बीच पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र को लेकर संबंध खराब है। दोनों सहयोगी सीरिया और लीबिया और नागोर्नो-करबाख में संघर्ष सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर असहमत हैं।