फ्रांसीसी सांसदो ने राष्ट्रपति को एक पत्र लिख कर फिलीस्तीन को देश के रूप मे मान्यता देने की मांग की है।

कुद्स आनलाइन के अनुसार फ्रांस में सभी राजनीतिक मोर्चों से लगभग 154 फ्रेंच सांसदों ने फ्रांस के राष्ट्रपति को एक पत्र लिख कर फ़िलीस्तीन को देश के रूप मे मान्यता देने की मांग की

रिपोर्ट अनुसार फ्रांस के 154 प्रतिनिधियो और सेनंटरो ने आज रविवार को फ्रांस की न्यूज़ एजेसी को पत्र के बारे मे बताया कि उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रेनकोइस ओलांद से फ़िलीस्तीन को औपचारिक पहचान देने की मांग की है।

फ्रांसीसी सांसदो ने अपने राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए पत्र मे लिखा कि फ्रांस को गतिरोध तोड़ने के लिए अपनी इच्छा व्यक्त करनी चाहिए और फ़िलीस्तीनियों की मौलिक अधिकार तथा आत्म-निर्णय के लिए औपचारिक रूप से स्वतंत्र देश माना जाए। यह विषय भी इस्राईल की सुरक्षा की भांति अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के ढांचे के भीतर है।

पत्र मे यह भी आया है कि श्रीमान राष्ट्रपति आज से फ़िलिस्तीन को औपचारिक पहचान देने के इस ऐतिहासिक अवसर को हाथ से न जाने दे और अपनी क्षमता को साबित करे।

फ्रांस न्यूज एजेसी के अनुसार इस पत्र मे दक्षिण पंथी और विपक्षी राजनीतिक प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर को सूची मे देखा जा सकता है उनमे सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि और फ्रांस-फिलिस्तीन मैत्री समूह के अध्यक्ष गिल्बर्ट रोजर, कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि मारिए जॉर्ज बुफे और पियरे लौरेंत, पर्यावरण समर्थक सीनेटर एलन आरशिंबू और एस्थर बिनबासा,  सोशलिस्ट प्रतिनिधि  मारिए नोएल लीनमान और मैथ्यू आनोथिन, चुनाव आयोग के उपाध्यक्ष कैथरीन तास्का, फ्रांस के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बेनोइट हामून, फ्रांस की रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिनिधि जान लुक रीटर्ज और मिशेल विवाजन के नाम उल्लेखनीय है।

फ़िलिस्तीन को औपचारिक पहचान प्रदान करने का अनुरोध ऐसे समय में है जब इस्राईल और फ़िलिस्तीन के बीच शांति वार्ता को पुनर्जिवित करने के लिए फ्रांस की राजधानी मे 15 जनवरी 2017 को एक अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ, इस सम्मेलन के समापन पर एक बयान जारी हुआ जिसमे इस्राईल और फिलिस्तीन की समस्या का समाधान करने के लिए दो देशो की मान्यता पर जोर दिया गया।

15 जनवरी को फ़िलिस्तीन और इस्राईल के बीच शांति वार्ता को पुनर्जीवित करने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मे दोनो पक्ष अनुपस्थित थे यह सम्मेलन फ्रांस की राजधानी पेरिस मे 70 देशो के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित हुआ। सम्मेलन में दर्जनो अरबी देशो के प्रतिनिधियो के अलावा यूरोपीय और संयुक्त राष्ट्र परिषद के स्थायी सदस्यों ने सम्मेलन मे भाग लिया।


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