फ्रांसीसी नेशनल असेंबली के एक विशेष आयोग ने “गणतंत्रात्मक मूल्यों के चार्टर” को मंजूरी दे दी है। जिसे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इस्लामवाद और अलगाववाद से निपटने के लिए लाये है।

इस विधेयक को तथाकथित “इस्लामवादी अलगाववाद” से लड़ने के लिए इमैनुएल मैक्रोन द्वारा अक्टूबर 2 पेश किया गया था।

आंतरिक मंत्री गेराल्ड डर्मैनिन ने ट्विटर पर कहा कि मसौदा कानून, जो गणतंत्र के सिद्धांतों को मजबूत करने की वकालत करता है, विशेष आयोग द्वारा व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया गया।

डारमेनिन ने कहा कि फ्रांस भविष्य के लिए एक कानून बना रहा है, न केवल आज की कठिनाइयों का विरोध करने के लिए बल्कि गणतंत्र के मूल्यों का बचाव करने के लिए।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में दूर-दराज़ और वामपंथी संरचनाओं का बढ़ना भी एक खतरा है।

फ्रांसीसी फ्रेंच काउंसिल ऑफ वरशिप (सीएफसीएम) के तीन संगठनों ने गुरुवार को एकतरफा इस्लाम के खिलाफ बताते हुए “गणतंत्रात्मक मूल्यों के चार्टर” की निंदा की।

विधेयक को फरवरी में नेशनल असेंबली में प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है।

मसौदा कानून की आलोचना की जा रही है क्योंकि यह मुस्लिम समुदाय को लक्षित करता है और उनके जीवन के लगभग हर पहलू पर प्रतिबंध लगाता है।

यह मस्जिदों में हस्तक्षेप करने और मस्जिदों के प्रशासन के लिए जिम्मेदार संगठनों के साथ-साथ मुस्लिमों से संबंधित संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों के वित्त को नियंत्रित करने के लिए प्रदान करता है।

2004 का एक कानून फ्रांसीसी स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों के पहनने या खुले प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन यह विश्वविद्यालयों पर लागू नहीं होता है।

यह परिवारों को बच्चों को घर की शिक्षा देने से रोककर मुस्लिम समुदाय के शिक्षा विकल्पों को भी प्रतिबंधित करता है।

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