बंटवारे के 71 साल बाद पहली बार अपने सिख भाई से मिलीं मुस्लिम बहनें, गले मिलकर खूब रोए

6:34 pm Published by:-Hindi News
1543309688 reunion

लाहौर : पाकिस्‍तान के पंजाब प्रांत स्थित ननकाना साहिब में हर साल बड़ी संख्‍या में भारतीय सिख श्रद्धालु भी पहुंचते हैं।इस साल भी भारतीय सिख श्रद्धालुओं का एक जत्‍था गुरुनानक जयंती के मौके पर यहां पहुंचा। लेकिन इस बार की यात्रा अलग ही रही। जो कभी न भूली जाएगी।

दरअसल, भारत-पाक विभाजन के 70 साल बाद दो मुस्लिम बहनें अपने सिख भाई से मिलीं। डेरा बाबा नानक के पास स्थित एक गांव से ताल्लुक रखने वाले इन तीनों भाई बहनों की मुलाकात रविवार को पाकिस्तान स्थित गुरु नानक देव के जन्म स्थान ननकाना साहिब गुरुद्वारे में हुई। साथ दशक बाद अपने भाई बेअंत सिंह को बहन उल्फत बीबी और मैराज बीबी ने कसकर गले लगा लिया। लेकिन इन 7 दशकों से भी अधिक के समय में काफी कुछ बदल चुका। बहनें अब पाकिस्‍तान की नागरिक हैं और इस्लाम धर्म कबूल कर चुकी हैं, लेकिन भाई अब भी सिख धर्म का पालन करते हैं।

‘द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून’ के मुताबिक, मुस्लिम बहनें उल्‍फत बीबी और मिराज बीबी 7 दशकों बाद सिख भाई बेअंत सिंह के गले लगीं, जिनसे इस दौरान उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई। हालांकि इस दौरान उनके बीच चिट्ठ‍ियों का आदान-प्रदान होता रहा। दोनों मुस्लिम बहनों और सिख भाई का परिवार मूल रूप से भारत में पंजाब राज्‍य के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक के पास स्थित पारचा गांव का रहने वाला है। 1947 के विभाजन के दौरान बड़ी संख्‍या में दोनों ओर से लोगों ने पलायन किया था। इसी दौरान बेअंत सिंह का परिवार पाकिस्‍तान जा रहा था, जब दोनों बहनें भाई से बिछड़ गईं। दोनों बहनें तो पाकिस्‍तान में परिवार के साथ बस गईं, लेकिन बेअंत सीमा पार नहीं कर पाए और भारत में ही रह गए।

पाकिस्तान के अखबर एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बात करते हुए उल्फत बीबी ने कहा कि वह भारत में रह रही अपनी भाभी और भतीजों से भी मिलना चाहती हैं, उन्हें इसकी इजाजत मिलनी चाहिए। उल्फत और मिराज ने पाकिस्ताने के प्रधानमंत्री इमरान खान से अपने भाई बेअंत के वीजा की अवधि बढ़ाने की भी अपील की। हाल ही में भारत और पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब गलियारे को खोलने की इजाजत दे दी। इससे भारतीय सिखों का पाक में स्थित अपने पवित्र तीर्थस्थल करतारपुर साहिब पहुंचना आसान हो जाएगा।

करतारपुर साहिब सिखों के करतारपुर साहिब सिखों के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शुमार होता है। करतारपुर साहिब सिखों के प्रथम गुरु, गुरुनानक देव जी का निवास स्‍थान था। गुरू नानक ने अपनी जिंदगी के आखिरी 17 साल 5 महीने 9 दिन यहीं गुजारे थे। उनका सारा परिवार यहीं आकर बस गया था. उनके माता-पिता और उनका देहांत भी यहीं पर हुआ था। यह गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक से महज चार किमी दूरी पर है और भारत की तरफ से नजर आता है। गुरुद्वारा की एक झलक पाने के लिए बड़ी तादाद में सिख डेरा बाबा नानक में जुटते हैं।

खानदानी सलीक़ेदार परिवार में शादी करने के इच्छुक हैं तो पहले फ़ोटो देखें फिर अपनी पसंद के लड़के/लड़की को रिश्ता भेजें (उर्दू मॅट्रिमोनी - फ्री ) क्लिक करें