मस्जिदुल अक्सा को अपने कब्जे में लेने की साजिश के तहत इजराइल रो नए-नए मंसूबो पर अमल करता है. इन्ही में से एक पर अमल करते हुए इजराइल ने अल-अक्सा के आँगन में तीन फिलिस्तीनियों की हत्या के बाद मस्जिद को बंद कर नमाज पर रोक लगा दी है.

1969 के बाद यह पहली बार हुआ है कि ज़ायोनी शासन ने मस्जिदुल अक़सा में नमाज़े जुमा नहीं होने दी और मस्जिद को इबादत के लिए बंद कर दिया है. मस्जिद में नमाज पर रोक के बाद फ़िलिस्तीनियों ने मजबूर होकर मस्जिद के निकट ही बाबुल असबात में नमाज़ अदा की, जिसके बाद वरिष्ठ मुफ़्ती शेख़ मोहम्मद अहमद हुसैन को गिरफ़्तार कर लिया गया.

मुफ़्ती शेख़ मोहम्मद की गिरफ्तारी की पूरी दुनिया ने तीखी आलोचना की है. ग़ौरतलब है कि इस्राईलियों ने हालिया महीनों में मस्जिदुल अक़सा पर हमलों में अत्यधिक वृद्धि कर दी है और वे इसके वास्तविक ढांचे को बदल देना चाहते हैं.

वहीँ मस्जिदुल अक़सा के एक अधिकारी शेख़ उमर केसवानी ने मस्जिद को बंद करने और फ़िलिस्तीनियों को नमाज़े जुमा अदा करने से रोकने के लिए ज़ायोनी शासन की कड़ी निंदा की है.

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