अतीत की तमाम आपत्तियों के विरुद्ध ज़ायोनी सेना से डट कर मुक़ाबला करने वाली और बिना डर फ़िलिस्तीन का समर्थन करने वाली महिलाओं ने फ़िलिस्तीन की पहली क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

और उनका यह समर्थन यथार्थ है इस प्रकार की उस समय ज़ायोनी शासन का शिकार बनने वालों में एक तिहाई महिलाएं थी, और गांवों के मुक़ाबले में शहर की महिलाओं ने इसमें अधिक बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था।


क्रांति ने महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में भाग लेने के लिए अनुमति दी है जब कि पहले महिलाएं केवल स्थानीय राजनीति में ही सक्रिय थीं।
फ़िलिस्तीनी महिलाओं का राजनीति में प्रवेश सत्तर के दशक में कुछ छात्र आंदोलनों से शुरू हुआ, जिसके साथ ही राजनीतिक बंदी महिलाओं की संख्या कुछ सौ से बढ़कर कई हज़ार हो गई और यह संख्या सत्तर से अस्सी के दशक तक लगातार बढ़ती रही।
इसी प्रकार महिलाएं जिनको जार्डर के एक फ़ैसले के तहत 1995 में वोट डालने का अधिकार नहीं था वह 1976 में चुनाव में भाग लेतीं और उनमें से कुछ संसद तक पहुँचने में भी कामयाब रही थीं।
आजीविका की स्थिति गंभीर होने और इस्राईल के बढ़ते आक्रमण के साथ ही, महिलाओं की उपस्थिति भी पत्थर फेंकने या प्रदर्शनों में भाग लेने में अधिक हो गई।
इसी प्रकार इस्राईली नाकेबंद के बढ़ने के बाद महिलाओं ने आत्मनिर्भरता हासिल करने और नाकेबंदी के कारण पैदा हुई कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण रोल अदा किया है।

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